कैंसर पीड़ित शिक्षिका के स्थानांतरण प्रकरण में हाईकोर्ट सख्त, सचिव को तलब — कई मामलों में अदालत की तीखी टिप्पणी

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कैंसर पीड़ित शिक्षिका के स्थानांतरण प्रकरण में हाईकोर्ट सख्त, सचिव को तलब — कई मामलों में अदालत की तीखी टिप्पणी

✍️ सरकारी कलम | न्यायालय विशेष रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कैंसर पीड़ित सहायक अध्यापिका के स्थानांतरण को अस्वीकार करने पर गहरी नाराज़गी जताते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब अदालत ने पहले ही सहानुभूतिपूर्ण विचार करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, तब भी अधिकारियों ने तकनीकी आधार पर फाइल खारिज कर दी—यह बेहद दुखद और अस्वीकार्य है।


🎗️ कैंसर पीड़ित अध्यापिका के मामले पर हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी

न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत शाहजहांपुर की शिक्षिका कल्पना शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पहले ही कहा था कि—

“याची कैंसर पीड़ित है—ऐसे मामलों में मानवता और संवेदनशीलता सर्वोपरि होनी चाहिए।”

लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से दिया गया जवाब अदालत को इतना असंतोषजनक लगा कि कोर्ट ने कहा—

❗ “यह आश्चर्य की बात है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अधिकारियों ने सहानुभूतिपूर्ण विचार नहीं किया।”

❗ “तकनीकी आधार पर आवेदन खारिज करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”

❗ “सचिव मामले के सभी पहलुओं पर विचार किए बिना निर्णय ले बैठे, जो न्यायालय की भावना के विपरीत है।”

अब सचिव को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा

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🚨 मथुरा कैनाल अतिक्रमण: हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव सिंचाई को अवमानना नोटिस जारी किया

हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित कैनाल पर वर्षों से चल रहे अतिक्रमण हटाने के आदेश का पालन न करने पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति सौरभ शेखर पाठक की अदालत ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग को अवमानना नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने पूछा—

❓ “हाईकोर्ट के वर्षों पुराने आदेश का अब तक पालन क्यों नहीं हुआ?”

❌ “अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया?”

अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर न मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


🛣️ मेरठ: करनाल नगर पंचायत में बन रही सीसी रोड पर भी हाईकोर्ट सख्त

हाईकोर्ट की डबल बेंच (न्यायमूर्ति अजित कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी) ने मेरठ के करनाल नगर पंचायत में बन रही सीसी रोड की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

याचिका रूपेश कुमार ने दाखिल की थी। कोर्ट ने कहा—

✔️ टेस्टिंग रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल नहीं की गई

✔️ अधिशासी अधिकारी द्वारा हलफ़नामा भी नहीं दिया गया

इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया—

➡️ टेस्टिंग रिपोर्ट सहित हलफ़नामा शीघ्र दाखिल करें
➡️ अन्यथा एसडीएम सरधना और अधिशासी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा

अदालत ने स्पष्ट कहा कि निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।


📢 निष्कर्ष — हाईकोर्ट के कड़े रुख से प्रशासन में हलचल

तीनों मामलों में हाईकोर्ट का रुख बेहद स्पष्ट रहा—

✔️ कैंसर पीड़ित शिक्षिका को न्याय और मानवीय आधार

✔️ वर्षों पुराने अतिक्रमण हटाने के आदेश का पालन

✔️ सीसी रोड निर्माण की गुणवत्ता पर पारदर्शिता

अदालत की इन टिप्पणियों से संबंधित विभागों में हलचल मच गई है और आने वाले दिनों में इन मामलों में तेजी से कार्रवाई होने की संभावना है।


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