टीजीटी–पीजीटी भर्तियों पर फिर कैंची! शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बनाया ‘परीक्षा स्थगन’ का रिकॉर्ड 😞📚
उत्तर प्रदेश के प्रतियोगी छात्रों के लिए यह साल सबसे निराशाजनक साबित होता दिख रहा है। शिक्षा सेवा चयन आयोग लगातार चौथी बार भर्ती परीक्षाएं स्थगित कर चुका है—और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
सबसे ताज़ा मामला टीजीटी भर्ती परीक्षा का है, जिसे मंगलवार को चौथी बार टाल दिया गया। इससे पहले प्रवक्ता (PGT) भर्ती परीक्षा भी चार बार स्थगित हो चुकी है। इतना ही नहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के इंटरव्यू भी स्थगित हो चुके हैं।
बार-बार परीक्षा टलने से लाखों प्रतियोगियों में भारी नाराज़गी और निराशा है।
आख़िर कब आएगा इंतज़ाम में सुधार?
आख़िर कब मिलेगी छात्रों को स्थायी तारीख़?
📌 परीक्षाएं बार-बार क्यों टल रहीं?
आयोग लगातार दो कारण बता रहा है—
1. पूर्व तैयारी का अभाव ❗
कई बार परीक्षा स्थगन की वजह यह बताई गई कि आयोग तैयार नहीं था—सेंटर आवंटन, व्यवस्थाएँ, सुरक्षा आदि अधूरी थीं।
2. प्रो. कीर्ति पांडेय का इस्तीफा ⛔
तीनों परीक्षाओं की एक-एक तारीख़ प्रो. कीर्ति पांडेय के अचानक इस्तीफा देने के बाद बदली गई।
पर बड़ी सच्चाई यह है कि—
“तैयारी की कमी और समय पर निर्णय न लेना ही मुख्य कारण है।”
📝 टीजीटी–पीजीटी भर्ती का पूरा टाइमलाइन (एक नज़र में)
📘 PGT परीक्षा इन तारीखों को प्रस्तावित थी:
- 11–12 अप्रैल 2025
- 20–21 जून 2025
- 18–19 जून 2025
- 15–16 अक्टूबर 2025
कुल: 4 बार स्थगन!
📗 TGT परीक्षा—3539 पदों पर 8.68 लाख आवेदन!
- TGT पद: 3539
- आवेदन: 8,68,531
📙 PGT परीक्षा—624 पदों पर 4.64 लाख आवेदन
- PGT पद: 624
- आवेदन: 4,64,605
लाखों छात्रों का भविष्य अधर में—और लगातार स्थगन से मानसिक दबाव दोगुना!
😠 प्रतियोगी छात्रों में नाराज़गी चरम पर
प्रतियोगी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष विक्की खान का कहना है—
“यह प्रतियोगियों का मानसिक उत्पीड़न है। वर्षों से नई भर्ती नहीं, और जो भर्तियाँ निकली हैं वे भी महीनों से अटकी हैं। बड़ी संख्या में युवा ओवरएज हो रहे हैं—यह सरासर अन्याय है।”
प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधिमंडल के शीतला प्रसाद ओझा ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा—
“बार-बार परीक्षा टालना आयोग की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न है। परीक्षा नियंत्रक को हटाया जाए।”
📍 शिक्षा सेवा चयन आयोग की भूमिका पर बढ़ रहे सवाल
पहले TGT–PGT आवेदन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने लिए थे।
बाद में बोर्ड को भंग करके नया शिक्षा सेवा चयन आयोग बना दिया गया।
अब यह नया आयोग ही इन तीनों बड़ी भर्तियों को पूरा कराने की जिम्मेदारी निभा रहा है।
लेकिन—
❌ न समय पर नोटिफिकेशन
❌ न समय पर परीक्षा
❌ न परीक्षा की पारदर्शी तैयारी
जिससे आयोग की कार्यशैली पर बहस तेज़ हो गई है।
🧑🏫 शिक्षक भर्ती का इंतजार कब खत्म होगा?
शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं का सपना लगातार लटक रहा है।
भर्ती परीक्षाओं का बार-बार स्थगित होना सरकार और आयोग दोनों के लिए चुनौती है।
👉 प्रतियोगियों की साफ मांग है—
- स्थायी परीक्षा कैलेंडर
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही
- बिना तैयारी के परीक्षा घोषित न हो
- ओवरएज होने वाले छात्रों के लिए विशेष राहत
✍️ सर्कारी कलम की राय (Teachers-First Perspective)
शिक्षक भर्तियाँ सिर्फ परीक्षाएँ नहीं—
यह युवाओं के करियर, घर का भविष्य, और सम्मान का सवाल है।
हमारी स्पष्ट राय है कि—
✔ आयोग को जल्द से जल्द स्थायी परीक्षा शेड्यूल जारी करना चाहिए
✔ बार-बार स्थगन रोकने के लिए अलग “परीक्षा प्रबंधन सेल” बनना चाहिए
✔ ओवरएज हो रहे प्रतियोगियों को आयु-सीमा में विशेष छूट मिलनी चाहिए
✔ राज्य के शिक्षक-समर्थक संगठनों को इस मुद्दे पर गंभीरता से आवाज उठानी चाहिए
🔔 निष्कर्ष
टीजीटी-पीजीटी और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का स्थगित होना अब नियम बनता जा रहा है, अपवाद नहीं।
लाखों युवा इससे मानसिक तनाव, असमंजस और भविष्य की चिंता में डूबे हुए हैं।
सरकार और आयोग दोनों को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।
