📰 सरकारी कलम विशेष विज्ञान रिपोर्ट
“होंठों के प्रिंट: जन्म से मृत्यु तक न बदलने वाली पहचान – सेंट्रल यूपी में दिलचस्प फोरेंसिक अध्ययन”
मानव शरीर में पहचान के कई स्थायी चिन्ह होते हैं— फिंगरप्रिंट, रेटिना पैटर्न, डीएनए इत्यादि। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होंठों के निशान (Lip Prints) भी उतने ही अनोखे और स्थायी होते हैं?
सेंट्रल यूपी में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के फोरेंसिक विभाग ने इसी विषय पर बड़ा अध्ययन किया है।
फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. राहुल देव की अगुवाई में किए गए इस शोध में पुरुष और महिलाओं के होंठों के पैटर्न को विस्तार से जांचा गया। परिणाम हैरान करने वाले हैं!
👄 होंठों के निशान – जन्म से मृत्यु तक समान
- गर्भ के 6 से 9 सप्ताह के बीच शिशु के होंठ बनते हैं।
- इसी समय लिप प्रिंट पैटर्न भी बन जाते हैं।
- एक बार बनने के बाद ये प्रिंट मरते दम तक नहीं बदलते।
- इसलिए इन्हें भी फिंगरप्रिंट की तरह स्थायी पहचान चिन्ह माना जाता है।
- दुनिया के दो व्यक्तियों के होंठों के प्रिंट कभी एक जैसे नहीं हो सकते।
➡️ होंठों के प्रिंट का विज्ञान चिलियोस्कोपी (Cheiloscopy) कहलाता है।
🔍 फोरेंसिक में होंठों के प्रिंट क्यों महत्वपूर्ण?
यदि किसी अपराध स्थल पर
- फिंगरप्रिंट न हों
- पैर के निशान न हों
- आंख (रेटिना) के संकेत उपलब्ध न हों
तो कांच, कप, गिलास या किसी वस्तु पर मिले होंठ के प्रिंट अपराधी की पहचान खोल सकते हैं।
होंठों का निशान व्यक्ति के लिंग यानी महिला या पुरुष के बारे में भी संकेत देता है।
📊 अध्ययन में क्या पाया गया?
शोध में कुल 75 प्रतिभागी शामिल थे:
- 35 महिलाएँ
- 40 पुरुष
✔️ महिलाओं में कौन सा पैटर्न सबसे ज़्यादा?
👉 टाइप-1 प्रिंट (गहराई वाले निशान)
सेंट्रल यूपी की महिलाओं के होंठों पर यह पैटर्न सबसे सामान्य पाया गया।
✔️ पुरुषों में कौन से पैटर्न देखे गए?
👉 टाइप-3 (X आकार वाले निशान)
👉 टाइप-4 (हेज जैसे पैटर्न)
📝 होंठों के प्रिंट के 5 मुख्य प्रकार
- टाइप-1 : गहरे और साफ निशान
- टाइप-2 : टूटे–टूटे रेखाओं वाले निशान
- टाइप-3 : X आकार वाले क्रॉस पैटर्न
- टाइप-4 : हेज या झाड़ी जैसी रेखाएं
- टाइप-5 : रैंडम, मिश्रित पैटर्न
इनमें से हर पैटर्न के अंदर भी छोटे-छोटे उप-पैटर्न होते हैं, जिससे हर व्यक्ति का लिप प्रिंट uniquely अलग हो जाता है।
🔥 क्या होंठों के प्रिंट मिट सकते हैं?
डॉ. देव के अनुसार—
❗ केवल एक स्थिति में: होंठ जल जाने पर
अन्यथा जीवनभर ये निशान अपरिवर्तित रहते हैं।
🎯 सरकारी कलम का निष्कर्ष
सेंट्रल यूपी में किया गया यह शोध फोरेंसिक विज्ञान के लिए बड़ी उपलब्धि है।
यह साबित करता है कि लिप प्रिंट भी अपराध जांच, पहचान प्रमाणन और मानव शरीर की जैविक विशिष्टता समझने का विश्वसनीय आधार हैं।
यह शोध बताता है कि
- पहचान के लिए केवल फिंगरप्रिंट ही नहीं,
- होंठों के प्रिंट भी अद्वितीय पासवर्ड की तरह काम करते हैं।
