📢 ऑनलाइन उपस्थिति से पहले शिक्षक समस्याओं के समाधान की मांग — प्रदेशव्यापी शिक्षक संगठनों की संयुक्त आवाज
प्रेस नोट — 13 नवम्बर 2025
मीटिंग के प्रारम्भ में जो मॉडल प्रस्तुत किया गया, उसके अनुसार संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यालय संचालन आरम्भ होने के प्रथम घंटे के अंदर विद्यालय के सभी शिक्षकों की उपस्थिति/अनुपस्थिति ऑनलाइन भेजनी होगी। यह प्रस्ताव निश्चित रूप से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से आया है, पर शिक्षक प्रतिनिधियों ने इसमें जिन व्यावहारिक समस्याओं और अनसुलझे पहलुओं को इंगित किया, उन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। ⚖️📋
🔔 शिक्षक प्रतिनिधियों की साझा मांगें (सार) — बैठक के बाद जारी सामूहिक प्रेस नोट
- ऑनलाइन प्रणाली लागू करने से पहले अवकाशों का समायोजन:
बैठक में कहा गया कि इस प्रकार की नई प्रणाली लागू करने से पूर्व शिक्षकों के वर्ष भर के अनुमोदित/अवकाश व आकस्मिक/अर्ध-आकस्मिक अवकाश का उपयुक्त समायोजन सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी शिक्षक को अनुचित वंचना न झेलनी पड़े। 📆✅ - आवास के निकट विद्यालयों में तैनाती:
शिक्षकों से विकल्प लेकर, उन्हें उनके आवास के नजदीकी विद्यालयों में नियुक्ति (ट्रांसफर/तैनाती) किया जाए — ताकि दैनिक आवागमन व पारिवारिक दायित्वों में संतुलन बना रहे। 🏫➡️🏠 - गृह जनपद में स्थानान्तरण की व्यवस्था:
जो शिक्षक दूसरे जनपदों में कार्यरत हैं, उनके गृह जनपदों में स्थानांतरण की एक स्पष्ट, शीघ्र और न्यायसंगत प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। 🗺️🔁 - वेतन व प्रोन्नति के संवैधानिक लाभ:
जिन शिक्षकों को प्रोन्नति/प्रतिनियुक्ति के दौरान कोई वित्तीय या वेतन संबंधी बाधा है, उनके अधिकारों का शीघ्र निपटारा किया जाए और जो भी प्रोन्नति-वेतनमान नियम हैं, उनका पारदर्शी व समुचित पालन हो। 💼💸 - गैर-शैक्षणिक कार्यों से छूट:
शिक्षकों को उनकी प्राथमिक शैक्षणिक ज़िम्मेदारियों पर फोकस करने के लिए गैर-शैक्षणिक, प्रशासनिक या अन्य असम्बन्धित कार्यों से पूर्णतया या अधिकतम मामूली मुक्त रखा जाए — ताकि शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित न हो। 🎓✋
मुल्यांकन और अगला कदम
शिक्षक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता के समर्थन में हैं, किन्तु किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले मैदान के वास्तविक समस्याओं और शिक्षकों की व्यावहारिक कठिनाइयों का निवारण आवश्यक है। इसलिए प्रतिनिधियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उपर्युक्त माँगों पर त्वरित और लिखित प्रतिक्रिया दी जाए और नीति क्रियान्वयन से पहले संवाद की एक और परत आयोजित की जाए। 🤝📨
बैठक के बाद जारी किए गए सामूहिक प्रेस नोट पर सभी उपस्थित शिक्षक प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर अंकित हैं — जो इस बात का परिचायक हैं कि यह मांगें एकल नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के शिक्षकीय समुदाय की साझा आवाज़ हैं। ✍️📃


