✍️ शिक्षक महारैली : टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ दो लाख शिक्षक दिल्ली में दिखाएंगे अपनी ताकत!
🗓️ 5 दिसंबर को रामलीला मैदान में गूंजेगी शिक्षकों की आवाज़
📍 लखनऊ।
देशभर के प्राथमिक शिक्षक अब एक बार फिर सड़कों पर उतरने जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को सभी प्राथमिक शिक्षकों के लिए अनिवार्य करने के फैसले के विरोध में 5 दिसंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में “शिक्षक महारैली” आयोजित की जा रही है। इस महारैली में करीब दो लाख शिक्षक शामिल होंगे — जिनमें से एक लाख से अधिक शिक्षक सिर्फ उत्तर प्रदेश से पहुंचेंगे।
💪 “अब नहीं चलेगा अन्याय” — शिक्षकों का ऐलान
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने रविवार को लखनऊ के शिक्षक भवन, रिसालदार पार्क में सभी जिलाध्यक्षों और महामंत्रियों की संयुक्त बैठक की।
बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा और संचालन महामंत्री संजय सिंह ने किया।
संगठन ने स्पष्ट कहा —
“टीईटी की अनिवार्यता शिक्षकों का अपमान है। जो शिक्षक वर्षों से बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं, उनकी योग्यता पर सवाल उठाना अस्वीकार्य है।”
🚌 ब्लॉकवार जिम्मेदारी तय, तैयारियां जोरों पर
महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि महारैली में शिक्षकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर ब्लॉकवार शिक्षक संख्या निर्धारित की गई है।
हर ब्लॉक के पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र से निर्धारित संख्या में शिक्षकों को दिल्ली पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
रैली में देश के 14 राज्यों से भी शिक्षक प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इन सभी राज्यों के संगठन “टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI)” के तहत एकजुट होकर इस आंदोलन में भाग लेंगे।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक – दो मोर्चों पर लड़ाई
संघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि संगठन सुप्रीम कोर्ट में टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है,
साथ ही अब केंद्र सरकार और एनसीईआरटी के समक्ष भी इस नीति को समाप्त करने की मांग रखी जाएगी।
उन्होंने कहा —
“5 दिसंबर का दिन सिर्फ विरोध का नहीं, बल्कि एकता का प्रतीक होगा। जब संसद सत्र चल रहा होगा, तब लाखों शिक्षक रामलीला मैदान में अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे।”
👥 बैठक में शामिल प्रमुख पदाधिकारी
बैठक में संघ के कोषाध्यक्ष शिव शंकर पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी, संयुक्त महामंत्री देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव सहित सभी जिलाध्यक्ष मौजूद रहे।
सभी ने एक सुर में कहा कि यह रैली शिक्षकों के हक़ की निर्णायक लड़ाई साबित होगी।
🗣️ शिक्षक बोले – “योग्यता पर नहीं, नीयत पर भरोसा चाहिए”
प्रदेशभर से जुटे शिक्षकों ने कहा कि जब वे वर्षों से अपनी निष्ठा और मेहनत से बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं,
तो बार-बार पात्रता परीक्षा देना उनकी योग्यता पर संदेह जताने जैसा है।
“हम पढ़ा रहे हैं, परिणाम दे रहे हैं — फिर भी हर बार परीक्षा की तलवार लटकाई जाती है। यह अपमान हम नहीं सहेंगे।”
🏁 निष्कर्ष:
5 दिसंबर को दिल्ली का रामलीला मैदान शिक्षक एकता और सम्मान का गवाह बनेगा।
यह रैली सिर्फ एक परीक्षा के विरोध की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ है जो शिक्षकों को हर बार अपनी काबिलियत साबित करने पर मजबूर करती है।
देश के कोने-कोने से आ रहे शिक्षक अब सरकार से एक ही मांग करेंगे —
“टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करो, शिक्षक सम्मान बहाल करो!” ✊📚
📰 लेख: सरकारी कलम टीम
🌐 www.sarkarikalam.com
🖋️ शिक्षकों की आवाज़, शिक्षकों के पक्ष में ✍️
