🏫 शाहगंज इंटर कॉलेज में फर्जी नियुक्ति कांड! नौ लोगों पर मुकदमा दर्ज – शिक्षा विभाग में हड़कंप 😯
डीआईओएस ने पूर्व अधिकारियों और शिक्षकों पर कराई एफआईआर, कोर्ट में पहले से लंबित है याचिका
✍️ शाहगंज (जौनपुर) से बड़ी खबर
प्रदेश के जौनपुर जिले के जंग बहादुर सिंह इंटर कॉलेज, शाहगंज में कथित रूप से फर्जी शासनादेश के आधार पर की गई शिक्षकों की नियुक्तियों पर गंभीर कार्रवाई की गई है।
डीआईओएस जयराम सिंह ने इस मामले में नौ लोगों के खिलाफ कोतवाली शाहगंज में मुकदमा दर्ज कराया है।
⚠️ क्या है पूरा मामला?
करीब 10 वर्ष पहले कॉलेज में तीन सहायक अध्यापकों —
- गुलाब,
- ओमप्रकाश सिंह, और
- राकेश श्रीवास्तव
की नियुक्ति की गई थी।
आरोप है कि यह नियुक्तियाँ एक कूटरचित (फर्जी) शासनादेश के आधार पर की गईं और इसी के आधार पर उन्हें वेतन भुगतान व अन्य सेवा लाभ भी दिए गए।
जांच के दौरान तत्कालीन डीआईओएस, प्रबंधक और अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने वेतन भुगतान पर रोक लगा दी थी, जिस पर संबंधित शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया — मामला अब भी कोर्ट में विचाराधीन है।
⚖️ अब शासन का निर्देश और मुकदमा दर्ज
शासन से मिले स्पष्ट निर्देशों के बाद, डीआईओएस जयराम सिंह ने एसपी अभिषेक वर्मा को तहरीर सौंपी।
इसके बाद कोतवाली शाहगंज पुलिस ने संबंधित नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
👇 नामजद आरोपियों की सूची
- तत्कालीन डीआईओएस प्रभुराम चौहान (अब सेवानिवृत्त, निवासी हेतिमपुर, गाजीपुर)
- तत्कालीन आशुलिपिक अतुल कुमार श्रीवास्तव (वर्तमान में मिर्जापुर में कार्यरत)
- तत्कालीन वरिष्ठ सहायक/लेखाकार अशोक कुमार (सेवानिवृत्त, बलिया निवासी)
- तत्कालीन प्रबंधक हिमांशु सिंह
- तत्कालीन प्रधानाचार्य अमरनाथ दुबे (सेवानिवृत्त)
- तत्कालीन लिपिक रामानुज शुक्ला (सेवानिवृत्त)
- सहायक अध्यापक गुलाब
- सहायक अध्यापक ओमप्रकाश सिंह
- सहायक अध्यापक राकेश कुमार श्रीवास्तव
🚨 शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
डीआईओएस कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई शासन स्तर पर प्राप्त आदेशों के अनुपालन में की गई है।
मामला दर्ज होने के बाद शाहगंज समेत पूरे जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
🧾 कोर्ट में लंबित मामला और शिक्षक समुदाय की प्रतिक्रिया
शिक्षक समुदाय का कहना है कि —
“अगर नियुक्ति प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा हुआ है तो कार्रवाई निश्चित रूप से होनी चाहिए, लेकिन जिन शिक्षकों ने शासनादेश के भरोसे नियुक्ति पाई, उनके अधिकार और आजीविका का भी ध्यान रखा जाए।”
दरअसल, संबंधित शिक्षकों ने पहले ही न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है, और अंतिम निर्णय वहीं से तय होगा।
💬 सरकारी कलम की राय — शिक्षा में विश्वास बनना जरूरी है
शिक्षा तंत्र तभी मजबूत होगा जब नियुक्ति से लेकर वेतन भुगतान तक हर प्रक्रिया पारदर्शी हो।
यदि किसी ने पद या शासनादेश का दुरुपयोग किया है, तो उसे सज़ा मिलनी चाहिए।
परंतु यह भी उतना ही ज़रूरी है कि निर्दोष शिक्षकों की प्रतिष्ठा और आजीविका सुरक्षित रहे — क्योंकि शिक्षा का असली स्तंभ वही हैं जो ईमानदारी से कक्षा में ज्ञान बाँटते हैं। 🙏
🔎 निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का आईना है।
जहाँ एक ओर भ्रष्टाचार पर कार्रवाई आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के अधिकार और न्याय की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
“सरकारी कलम” इस पूरे प्रकरण पर नजर रखे हुए है और कोर्ट व विभागीय कार्रवाई की हर अगली जानकारी आप तक सबसे पहले पहुँचाएगा। 📰
