⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता: वैवाहिक विवाद और किशोरों के सहमति संबंधों में पॉक्सो कानून का दुरुपयोग

⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता: वैवाहिक विवाद और किशोरों के सहमति संबंधों में पॉक्सो कानून का दुरुपयोग

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते उन मामलों पर सख्त रुख दिखाया है, जहां पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम का उपयोग वैवाहिक विवादों और किशोरों के सहमति वाले संबंधों में गलत तरीके से किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन इसके दुरुपयोग से असली पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधा आती है। 😟

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लड़कों और पुरुषों को जागरूक करना है जरूरी 🧑‍🏫

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने साफ कहा कि युवाओं और पुरुषों को इस कानून के दायरे और गंभीरता के बारे में समय रहते जानकारी देने की आवश्यकता है। कई मामलों में किशोर आपसी सहमति से रिश्ते बनाते हैं, लेकिन बाद में पारिवारिक विवाद उत्पन्न होने पर पॉक्सो लगा दिया जाता है — जिससे लड़कों का जीवन प्रभावित होता है।

“कानून का दुरुपयोग रोकना उतना ही जरूरी है जितना कि पीड़ितों को न्याय दिलाना।”

जनहित याचिका पर सुनवाई — जागरूकता की मांग 📢

यह टिप्पणी उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आई जिसमें यह आग्रह किया गया था कि सरकार दुष्कर्म कानूनों और पॉक्सो अधिनियम के बारे में लोगों को संवेदनशील बनाए। ताकि महिलाओं और लड़कियों के लिए देश और सुरक्षित बन सके।

बेंच ने सुनवाई को 2 दिसंबर तक टालते हुए कहा कि कई राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने अब तक इस मामले में जवाब दाखिल नहीं किया है।

निर्भया केस के बाद कड़े हुए कानून — लेकिन जागरूकता कमी 📚

वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद हर्षद पोंडा की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि निर्भया केस के बाद देश में दुष्कर्म कानून और कठोर बनाए गए हैं। लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग इन कानूनों के बारे में सही जानकारी से वंचित हैं।

इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को नोटिस जारी किया है ताकि स्कूलों, मीडिया और फिल्मों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा सके। 🎬📰

निष्कर्ष ✨

पॉक्सो कानून बच्चों की सुरक्षा का मजबूत हथियार है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग होता है तो निर्दोष आरोपी मानसिक, सामाजिक और कानूनी तौर पर प्रभावित होते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख — पीड़ित की सुरक्षा और न्याय को प्राथमिकता देते हुए कानून के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

🔔 आप क्या सोचते हैं? पॉक्सो कानून में सुधार की जरूरत है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं!

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