⚖️ शादी के झूठे वादे पर बने यौन संबंध को वैध सहमति नहीं माना जा सकता – इलाहाबाद हाईकोर्ट 🏛️

⚖️ शादी के झूठे वादे पर बने यौन संबंध को वैध सहमति नहीं माना जा सकता – इलाहाबाद हाईकोर्ट 🏛️

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति शादी के झूठे वादे पर महिला से शारीरिक संबंध बनाता है, तो उसे कानून की नजर में वैध सहमति नहीं माना जा सकता। यह निर्णय न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने सुनाया है।

यह फैसला गोरखपुर निवासी आरोपी रवि पाल की उस याचिका पर आया, जिसमें उसने मुकदमे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने इसे योग्यता रहित पाया और याचिका खारिज कर दी।


📌 मामला क्या है?

पीड़िता ने 17 जनवरी 2024 को सहजनवा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप के अनुसार—

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  • आरोपी ने दोस्ती कर शादी का प्रस्ताव दिया
  • 21 और 23 नवंबर 2023 को घर और होटल में संबंध बनाए
  • उसे दिल्ली ले जाकर भी संबंध बनाए
  • इसके बाद जनवरी 2024 में छोड़कर फरार

आरोपी की ओर से दावा किया गया कि मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म साबित नहीं हुआ और पीड़िता झूठा फंसा रही है।

लेकिन कोर्ट ने कहा कि—

एफआईआर और बयान स्पष्ट करते हैं कि शादी का झूठा वादा जानबूझकर किया गया था, जिससे सहमति प्रभावित हुई। यह ट्रायल का विषय है।

इस आधार पर मुकदमे की कार्यवाही जारी रहेगी।


🧑‍⚖️ हाईकोर्ट के अन्य प्रमुख फैसले

📍 मामला 2 — 21.37 लाख रुपये मुआवजा बरकरार

एटा के संजय कुमार के स्थायी दिव्यांग होने पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा दिए गए ₹21.37 लाख मुआवजे को हाईकोर्ट ने उचित बताया और बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।

📍 मामला 3 — भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग को अवमानना नोटिस

हाईकोर्ट ने आयोग के चेयरमैन प्रो. बीएल मेहरा समेत अन्य को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने को कहा। आदेश पालन न करने पर अवमानना कार्यवाही की चेतावनी।

📍 मामला 4 — सचिन दत्ता की जमानत पर फैसला सुरक्षित

नोएडा के पूर्व महामंडलेश्वर सचिन दत्ता की धोखाधड़ी मामले में जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित रखा गया।

📍 मामला 5 — हत्या के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज

फाफामऊ में एक ही परिवार के चार हत्याओं के मामले में आरोपी संगीता गौतम को गंभीर आरोपों के कारण राहत नहीं मिली।


📝 निष्कर्ष

हाईकोर्ट का यह नया फैसला उन मामलों के लिए मजबूत मिसाल है, जहां शादी के नाम पर शोषण किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि—

👉 झूठे वादे पर दी गई सहमति, सहमति नहीं होती!


इस फैसले पर आपकी क्या राय है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं! 💬

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