📰: 24 हज़ार शिक्षकों की नौकरी पर संकट! अब “ब्रिज कोर्स” होगा अनिवार्य,शिक्षक इस कोर्स में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त – जानिए पूरा मामला 👇

📰: 24 हज़ार शिक्षकों की नौकरी पर संकट! अब “ब्रिज कोर्स” होगा अनिवार्य – जानिए पूरा मामला 👇

बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 24 हज़ार शिक्षकों के लिए अब आने वाले छह महीने बेहद अहम साबित होने वाले हैं। शिक्षा विभाग ने साफ़ निर्देश दिया है कि इन शिक्षकों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) द्वारा आयोजित ब्रिज कोर्स पूरा करना अनिवार्य होगा।
जो शिक्षक इस कोर्स में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। 😟


🔍 क्यों ज़रूरी पड़ा यह ब्रिज कोर्स?

दरअसल, कक्षा 1 से 5 तक के लिए नियुक्त शिक्षकों के लिए डीएलएड (D.El.Ed) योग्यता को मान्य माना गया है।
लेकिन 2018 से 2023 के बीच बड़ी संख्या में ऐसे बीएडधारी शिक्षक प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त हो गए, जिनकी योग्यता कक्षा 6 से 8 के लिए उपयुक्त थी।

बाद में, इस पर विवाद बढ़ा और मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीएड योग्यता केवल उच्च प्राथमिक (कक्षा 6-8) के लिए मान्य है, और जो बीएडधारी शिक्षक प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं, उन्हें “ब्रिज कोर्स” के माध्यम से आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।


📚 कोर्स में क्या-क्या पढ़ाया जाएगा?

NIOS द्वारा संचालित यह छह महीने का संवर्धन कोर्स (Enhancement Course) पूरी तरह से ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) मोड में कराया जाएगा।
इसके तहत शिक्षकों को निम्न विषयों में प्रशिक्षण मिलेगा –

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1️⃣ प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों का मनोविज्ञान
2️⃣ शिक्षण पद्धति (Pedagogy) एवं कक्षा प्रबंधन
3️⃣ बच्चों की सीखने की प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली

इन विषयों का उद्देश्य शिक्षकों को छोटे बच्चों की समझ, व्यवहार, और सीखने की गति के अनुरूप शिक्षण कौशल विकसित करना है।


🏫 NIOS तैयार कर रहा विशेष पोर्टल

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) की ओर से एक अलग पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शिक्षकों का नामांकन और कोर्स संचालन किया जाएगा।
राज्य के सभी क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशकों (RDDEs) को निर्देश दिया गया है कि जैसे ही कोर्स शुरू हो, वे शिक्षकों का समय पर नामांकन सुनिश्चित करें।


📅 कब तक पूरा करना होगा कोर्स?

अध्यापक शिक्षा परिषद के अनुसार,
➡️ कोर्स शुरू होने के एक वर्ष के भीतर सभी संबंधित शिक्षकों को इसे पूरा करना अनिवार्य होगा।
➡️ जो शिक्षक कोर्स में विफल रहेंगे या निर्धारित समय में पूरा नहीं करेंगे, उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।


⚖️ नियमावली 2023 के तहत होगी कार्रवाई

ब्रिज कोर्स में असफल या अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त होने के बाद उत्पन्न होने वाली रिक्तियां “बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक (नियुक्ति, स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्रवाई तथा सेवाशर्त) नियमावली 2023” के अंतर्गत भरी जाएंगी।


💡 “सरकारी कलम” की राय

यह कदम सरकार की ओर से शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में अहम पहल है।
हालांकि, शिक्षकों के बीच चिंता भी है कि अगर किसी कारणवश वे कोर्स में असफल हुए तो उनकी नौकरी पर तलवार लटक जाएगी।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि –

“सरकार को इस कोर्स को ‘नौकरी बचाने की शर्त’ न बनाकर ‘कौशल विकास अवसर’ के रूप में लागू करना चाहिए।”


🗣️ निष्कर्ष

ब्रिज कोर्स का उद्देश्य स्पष्ट है —

“बीएडधारी शिक्षकों को प्राथमिक शिक्षा के अनुरूप प्रशिक्षित करना ताकि बच्चों की नींव मजबूत हो।”

लेकिन इस दौरान शिक्षकों की नौकरी सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक दबाव को भी ध्यान में रखना सरकार के लिए ज़रूरी होगा।


✍️ लेखक – सरकारी कलम टीम
📅 Source: शिक्षा विभाग, बिहार / NIOS
🌐 www.sarkarikalam.com


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