इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को एक प्रभावी तंत्र तैयार करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पी. के. गिरि की एकल पीठ ने बांदा निवासी शिक्षिका इंद्रा देवी की याचिका पर दिया।
इंद्रा देवी को विद्यालय में देर से आने के आरोप में निलंबित किया गया था, जिसे उन्होंने कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य के मुख्य सचिव इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 10 नवंबर तय की और सरकार से पूरी जानकारी मांगी है।
🔹 कोर्ट ने कहा कि “आज के तकनीकी युग में इलेक्ट्रॉनिक उपस्थिति दर्ज करना कोई कठिन कार्य नहीं है।”
🔹 अदालत ने सुझाव दिया कि यदि कोई शिक्षक कभी-कभार 10 मिनट देरी से आता है, तो उसे मानवीय दृष्टिकोण से छूट दी जा सकती है — लेकिन “यह देरी आदत में शामिल नहीं होनी चाहिए।”
🔹 कोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि अब शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनानी ही होगी।
इस आदेश के बाद शिक्षण संस्थानों में डिजिटल हाजिरी सिस्टम या बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू किए जाने की संभावना बढ़ गई है।
