🧑‍⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी स्कूलों पर भी लागू होगा आरटीई एक्ट, बच्चों को रोकना न ही अनुत्तीर्ण घोषित किया जा सकता है।गैरकानूनी 📚

🧑‍⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी स्कूलों पर भी लागू होगा आरटीई एक्ट, बच्चों को रोकना गैरकानूनी 📚
✍️ सरकारी कलम डेस्क | लखनऊ

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के प्रावधान निजी सहायता प्राप्त स्कूलों पर भी समान रूप से लागू होंगे। कोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा स्तर तक किसी भी बच्चे को न तो रोका जा सकता है और न ही अनुत्तीर्ण घोषित किया जा सकता है।


⚖️ मामला क्या था?

राजधानी लखनऊ के एक आईसीएसई से संबद्ध निजी स्कूल ने दो छात्रों — जिनकी उम्र क्रमशः 11 और 14 वर्ष थी — को कम उपस्थिति और कमजोर प्रदर्शन के आधार पर अगली कक्षा में प्रवेश देने से मना कर दिया था।
बच्चों के पिता ने इस निर्णय को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में चुनौती दी, यह कहते हुए कि यह कदम आरटीई एक्ट की भावना के विपरीत है।

WhatsApp Channel Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

🏛️ कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद स्कूल के निर्णय को कानूनी रूप से गलत ठहराया और दोनों छात्रों को पुनः प्रवेश देने व परीक्षा कराने का आदेश दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि—

“आरटीई एक्ट की धारा 16 के तहत, कोई भी बच्चा प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने से पहले न तो रोका जा सकता है और न ही उसे अनुत्तीर्ण घोषित किया जा सकता है।”


📚 निजी स्कूलों पर भी लागू होंगे आरटीई के सभी प्रावधान

स्कूल की ओर से यह दलील दी गई कि आरटीई एक्ट निजी सहायता प्राप्त संस्थानों पर पूरी तरह लागू नहीं होता।
हालांकि, अदालत ने इस तर्क को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया और कहा कि —

“आरटीई एक्ट की धारा 2(एन) में परिभाषित ‘स्कूल’ में सभी प्रकार के स्कूल शामिल हैं — सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी सहायता प्राप्त संस्थान। इसलिए अधिनियम की बाध्यता सभी पर समान रूप से लागू होती है।”


🔹 अदालत ने यह भी कहा

  • शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मौलिक अधिकार है।
  • स्कूलों का कार्य बच्चों को शिक्षित करना है, न कि उन्हें निकालना या रोकना।
  • आरटीई एक्ट की भावना यह है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

💬 ‘सरकारी कलम’ की राय

यह फैसला न सिर्फ दो बच्चों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि पूरे देश के निजी स्कूलों के लिए एक मजबूत संदेश भी देता है —
शिक्षा का अधिकार किसी भी संस्था की मनमानी पर निर्भर नहीं करता।
यह फैसला अब उन अभिभावकों के लिए भी उम्मीद का आधार बनेगा जिनके बच्चे कम उपस्थिति या प्रदर्शन के नाम पर स्कूल से बाहर कर दिए जाते हैं।


📍 मुख्य बिंदु एक नज़र में:

  • ⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ पीठ का फैसला
  • 👩‍🎓 दो छात्रों को पुनः प्रवेश व परीक्षा की अनुमति
  • 📘 आरटीई एक्ट की धारा 16 के तहत रोकना अवैध
  • 🏫 निजी सहायता प्राप्त स्कूलों पर भी आरटीई एक्ट लागू
  • 🕊️ कोर्ट का संदेश: कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न हो

“शिक्षा अधिकार है, इनाम नहीं — और इसे हर बच्चे तक पहुँचाना समाज की जिम्मेदारी है।”


Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top