प्रदेश के ≈4,000 एकल विद्यालयों में मिलेंगे और शिक्षक — डीएम अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी समायोजन 👩‍🏫➡️🏫

प्रदेश के ≈4,000 एकल विद्यालयों में मिलेंगे और शिक्षक — डीएम अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी समायोजन 👩‍🏫➡️🏫

बेसिक शिक्षा विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा — जिलाधिकारी की कमेटी में सरप्लस शिक्षकों को समायोजित कर विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य 📋✨


लखनऊ: प्रदेश के उन एकल (एक शिक्षक वाले) विद्यालयों में जल्द ही और शिक्षक तैनात किए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस क्रम में शासन को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के मुताबिक जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति जिला स्तर पर उपलब्ध सरप्लस शिक्षकों को पहचानकर उन एकल विद्यालयों में समायोजित करेगी जहाँ वर्तमान में सिर्फ एक नियमित शिक्षक है। ✅

पृष्ठभूमि — रिपोर्ट और पिछले समायोजन

शिक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट (2024-25 के डाटा पर आधारित) के अनुसार प्रदेश के 81 विद्यालयों में शून्य नामांकन है, जबकि लगभग 9,508 विद्यालय एकल शिक्षक वाले पाए गए थे। पिछले साल विभाग तीन चरणों में तबादला-समायोजन की मुहिम चला चुका है, जिससे काफी विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती हो चुकी है — लेकिन उसके बावजूद अभी भी लगभग चार हजार एकल विद्यालय बचे हैं। 📊

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आगे की प्रक्रिया — डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी क्या करेगी?

प्रस्ताव में कहा गया है कि जब शासन सहमति देगा, तो जिला स्तर पर एक स्थायी समिति गठित की जाएगी जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। इस समिति का काम होगा:

  • जिले में उपलब्ध सरप्लस शिक्षकों की पहचान करना,
  • उन शिक्षकों का समायोजन प्राथमिकता के आधार पर निकटवर्ती एकल विद्यालयों में करना,
  • यह सुनिश्चित करना कि हर विद्यालय में कम से कम दो नियमित शिक्षक हों — ताकि पढ़ाई-लिखाई और स्कूल संचालन बेहतर हो सके।

क्यों ज़रूरी है यह कदम?

विभाग का तर्क है कि एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ता है — पाठ्यक्रम, ऑफलाइन गतिविधियाँ, छुट्टियों के दौरान बैकअप जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। दो नियमित शिक्षकों की व्यवस्था से न केवल शिक्षण-गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि विद्यालय संचालन भी सुचारू रहेगा। 🎯

क्या शामिल नहीं किया जा रहा — शिक्षामित्रों का सवाल

अहम बात यह है कि इस गिनती में शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किया जा रहा — विभाग का फोकस नियमित (स्थायी) शिक्षकों की तैनाती पर है। यानी प्राथमिक शर्त यह है कि विद्यालय में कम से कम एक नियमित शिक्षक तो अनिवार्य रूप से होना चाहिए और दूसरी सीट नियमित शिक्षक से पूरी की जाएगी। 👥

निहितार्थ और चुनौतियाँ

इस योजना का सफल क्रियान्वयन कुछ चुनौतियों से जुड़ा है:

  1. हर जिले में उपलब्ध सरप्लस शिक्षकों की संख्या व उनकी विशेषज्ञता में असमन्वय,
  2. कभी-कभी तबादले/समायोजन से स्थानीय स्तर पर विरोध या संचालित प्रक्रियाओं में देरी,
  3. और दूरदराज़ विद्यालयों में तैनाती के दौरान परिवहन व आवास सम्बन्धी समस्याएँ।

फिर भी, लक्ष्य स्पष्ट है — हर विद्यालय में कम से कम दो नियमित शिक्षक सुनिश्चित कर शैक्षिक स्तर और स्कूल संचालन को मज़बूत बनाना। 💪📚

अगला कदम

शासन की सहमति मिलने के बाद विभाग जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा और जिलों को समायोजन के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद जिलाधिकारी-अध्यक्षता वाली समितियाँ सक्रिय होकर शेष ~4,000 एकल विद्यालयों में समायोजन की कवायद तेज़ी से शुरू कर देंगी। ⏩

नोट: यह रिपोर्ट विभागीय प्रस्ताव और हालिया उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित सार है। नीति निर्णयन व तैनाती से जुड़ी अंतिम जानकारी संबंधित जिलों और शासन आदेशों के प्रकाशन पर निर्भर करेगी।

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