📚 प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति अब होगी ऑनलाइन! इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में प्रदेश के सभी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि बच्चों के लिए आवश्यक शिक्षा प्राप्त करने के मौलिक अधिकार का किसी भी स्थिति में हनन नहीं होना चाहिए। ✍️
⚖️ अदालत का आदेश
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बांदा की शिक्षिका इंद्रा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सभी प्राइमरी स्कूलों में ऑनलाइन (डिजिटल) अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाए ताकि शिक्षकों की उपस्थिति का सटीक रिकॉर्ड रखा जा सके।
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज बघेल की पीठ ने पारित किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की शिक्षा का अधिकार सर्वोपरि है और शिक्षकों की अनुपस्थिति से इस अधिकार का हनन नहीं होना चाहिए।
👩🏫 स्कूलों में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, एसईएस बेसिक और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जिला और ब्लॉक स्तर पर टास्क फोर्स का गठन करें। इस फोर्स की जिम्मेदारी होगी कि सभी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
अदालत ने बांदा के डीएम और बीएसए से अपने जिले की रिपोर्ट भी मांगी है, ताकि इस आदेश के अनुपालन की स्थिति का आकलन किया जा सके।
💻 डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम का महत्व
कोर्ट ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों की उपस्थिति के लिए डिजिटल अटेंडेंस की व्यवस्था तो की है, लेकिन यह अभी तक धरातल पर प्रभावी रूप से लागू नहीं हुई है। इसलिए अब इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है।
🙏 अदालत का शिक्षकों के प्रति सम्मान
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अध्यापक गुरु हैं और वह परम ब्रह्म के समान हैं। न्यायालय ने इस भाव को प्रकट करते हुए कहा —
“गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः। गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥”
अदालत ने यह भी कहा कि शिक्षक का सम्मान तभी संभव है जब वह अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार और उपस्थित रहे। 🙏
🚀 अब आगे क्या?
इस आदेश के बाद यह लगभग तय है कि उत्तर प्रदेश के सभी प्राइमरी स्कूलों में अब शिक्षकों के लिए ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम जल्द ही अनिवार्य किया जाएगा। इससे शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और बच्चों की शिक्षा में निरंतरता बनी रहेगी। 🌟
➡️ निष्कर्ष: इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह निर्णय राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक नई दिशा प्रदान करेगा। यह न केवल शिक्षकों की जवाबदेही तय करेगा बल्कि बच्चों के मौलिक शिक्षा अधिकार को भी सशक्त बनाएगा। 📖
