सुप्रीम कोर्ट के टीईटी फैसले से 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित, संगठनों ने कोर्ट का रुख किया 🚨
📍 लखनऊ।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से परिषदीय शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता तय करने के बाद प्रदेश के लाखों शिक्षकों में भारी असमंजस और आक्रोश है। इस निर्णय से सीधे-सीधे 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार पहले ही पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुकी है, वहीं अब शिक्षक संगठन भी लगातार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
यूटा (United Teachers Association) भी पहुंचा सुप्रीम कोर्ट ✍️
यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि संगठन ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें 2017 में केंद्र सरकार के उस संशोधन अधिनियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए न्यूनतम अर्हता को अनिवार्य कर दिया गया था। उन्होंने इस संशोधन को मौलिक अधिकारों का हनन और असांविधानिक करार दिया।
यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ की भी याचिका
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (तिवारी गुट) ने भी सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दी है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने बताया कि याचिका दाखिल करने के समय उनके साथ संरक्षक व एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष वासवराज गुरिकर और महासचिव कमलाकांत त्रिपाठी भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि कई शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी के लिए आवेदन ही नहीं कर सकते—
- 2001 से पहले इंटर + बीटीसी के आधार पर नियुक्त शिक्षक।
- पांच साल से अधिक सेवा दे चुके शिक्षक।
- मृतक आश्रित कोटे में इंटर योग्यता पर नियुक्त शिक्षक।
दिल्ली में होगी बड़ी बैठक 🏛️
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इस मामले में आगे की रणनीति तय करने के लिए 5 अक्तूबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में बैठक बुलाई गई है। इसमें झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के शिक्षक संगठन शामिल होंगे। यदि तब तक केंद्र सरकार सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो दिल्ली कूच की तिथि तय की जाएगी।
झारखंड सरकार ने किया किनारा
जहां यूपी सरकार ने शिक्षकों के हित में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है, वहीं झारखंड सरकार ने साफ कर दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल नहीं करेगी। झारखंड सरकार का कहना है कि अधिकतर मामलों में पुनर्विचार याचिकाएं खारिज हो जाती हैं, इसलिए शिक्षक टीईटी की तैयारी करें।
सड़क पर भी लड़ी जाएगी लड़ाई ✊
यूटा के नेता सतेंद्र पाल सिंह ने कहा कि यह लड़ाई केवल अदालत में ही नहीं बल्कि सड़क पर भी लड़ी जाएगी। जल्द ही बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। उधर, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की है।
✅ संक्षेप में:
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित।
- यूपी सरकार और शिक्षक संगठन सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर चुके।
- 5 अक्तूबर को दिल्ली में बड़ी बैठक, आंदोलन की तैयारी।
- झारखंड सरकार ने रिव्यू पिटीशन से किया किनारा।
- शिक्षक संगठन बोले—“यह लड़ाई सड़क और सदन दोनों में लड़ी जाएगी।”
