⚖️ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला: पारिवारिक पेंशन पहली और दूसरी पत्नी में बराबर बांटी जाएगी
शिमला।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन पहली और दूसरी पत्नी के बीच समान रूप से बांटी जा सकती है, बशर्ते यह समझौता स्वेच्छा से हुआ हो।
क्या कहा अदालत ने?
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि—
👉 दोनों पत्नियों ने मध्यस्थता के दौरान स्वेच्छा से बयान दर्ज कराए।
👉 उन्होंने पारिवारिक पेंशन को 50-50 फीसदी बांटने पर सहमति जताई।
👉 यह बयान न किसी भय, न दबाव और न ही धोखाधड़ी के तहत दिए गए।
अदालत ने इस आधार पर एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह में पेंशन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करे।
मामला क्या था?
- यह मामला कमला देवी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य से जुड़ा है।
- अपीलकर्ता कमला देवी के पति सोहन लाल पुलिस विभाग में सहायक उप निरीक्षक (ASI) थे।
- वर्ष 1970 में कमला देवी और सोहन लाल का विवाह हुआ, और 1976 में उनकी एक बेटी हुई।
- बाद में दोनों के रिश्तों में खटास आने पर सोहन लाल ने 1979 में दूसरी शादी गायत्री देवी से की, जिनसे उन्हें चार संतानें हुईं।
क्यों है यह फैसला अहम?
यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण नज़ीर बनेगा जहां मृतक कर्मचारी की एक से अधिक पत्नियां होती हैं। अदालत ने यह साफ कर दिया कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से पेंशन बांटने को तैयार हों तो सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं करनी चाहिए।
👉 यह आदेश न सिर्फ न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि अदालत समझौते और सहमति को प्राथमिकता देती है, बशर्ते वह दबावमुक्त और निष्पक्ष हो।
