यूपी टीईटी 2025: आवेदन शुल्क में भारी वृद्धि, अभ्यर्थियों पर ₹3400 का बोझ 💰
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आवेदन शुल्क में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
अब तक दोनों स्तर की टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन शुल्क ₹600-₹600 निर्धारित था। लेकिन आयोग ने इसे बढ़ाकर ₹1700-₹1700 करने की तैयारी कर ली है। यानी यदि कोई अभ्यर्थी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तर की परीक्षा में शामिल होना चाहता है, तो उसे कुल मिलाकर ₹3400 शुल्क चुकाना होगा। ⚠️
शुल्क वृद्धि का कारण ❓
आयोग ने शासन को भेजे प्रस्ताव में कहा है कि —
👉 जून 2024 के शासनादेश के अनुसार “शुचितापूर्ण एवं पारदर्शी परीक्षा आयोजन” के लिए अधिक व्यय हो रहा है।
👉 हाल ही में 16-17 अप्रैल 2025 को कराई गई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में भी अधिक धनराशि खर्च हुई।
👉 इसी अतिरिक्त खर्च को देखते हुए अब टीईटी शुल्क में वृद्धि की जा रही है।
अभ्यर्थियों की नाराज़गी और सवाल 🤔
जहाँ आयोग इसे पारदर्शी परीक्षा आयोजन की मजबूरी बता रहा है, वहीं अभ्यर्थियों में इसे लेकर गंभीर नाराज़गी है।
- ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र पहले से ही महंगी कोचिंग और आवेदन शुल्क का बोझ उठा रहे हैं।
- अब ₹3400 का शुल्क देना, खासकर बेरोज़गार युवाओं के लिए, अनुचित और शोषणकारी कदम माना जा रहा है।
- शिक्षकों का कहना है कि शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को सरल और सस्ती होना चाहिए, ताकि हर वर्ग का विद्यार्थी इसमें सम्मिलित हो सके।
शिक्षकों और अभ्यर्थियों की माँग ✊
👩🏫 सरकारी कलम से बातचीत में कई अभ्यर्थियों ने कहा कि –
“टीईटी जैसी पात्रता परीक्षा सिर्फ एक क्वालिफाइंग टेस्ट है, इसमें इतना अधिक शुल्क लेना उचित नहीं है। आयोग को चाहिए कि पारदर्शिता के नाम पर छात्रों पर बोझ डालने के बजाय शासन से अतिरिक्त बजट की माँग करे।”
निष्कर्ष 📌
यूपी टीईटी 2025 का यह प्रस्ताव अगर शासन से मंज़ूरी पा जाता है, तो लाखों अभ्यर्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा। यह कदम न सिर्फ छात्रों के लिए कठिनाई पैदा करेगा, बल्कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की सुलभता और समानता पर भी सवाल खड़े करेगा।
👉 अब देखना होगा कि क्या शासन इस प्रस्ताव को मंज़ूरी देता है, या अभ्यर्थियों की आवाज़ सुनते हुए इसे वापस लेता है।
📢 सरकारी कलम की राय:
शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया छात्र-हितैषी होनी चाहिए, न कि शुल्क-वृद्धि आधारित। शिक्षा का दरवाज़ा सबके लिए खुला रहे, यही लोकतांत्रिक व्यवस्था का असली उद्देश्य है। ✍️
