अब तक एचपीवी (Human Papilloma Virus) को मुख्य रूप से सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) से जोड़ा जाता था, लेकिन केजीएमयू के इस अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि यह वायरस मुंह के कैंसर (Oropharyngeal Cancer) में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
शोध की मुख्य बातें 🧪
- 100 लोगों पर अध्ययन किया गया (50 कैंसर पीड़ित और 50 स्वस्थ)।
- कैंसर पीड़ितों में से 42 महिलाओं और 8 पुरुषों में एचपीवी की पुष्टि हुई।
- स्वस्थ लोगों में एचपीवी नहीं पाया गया।
- अध्ययन International Journal of Oral Oncology में प्रकाशित हुआ।
- नए बायोमार्कर (miR-93, 222, 320, 145 आदि) से जांच की गई।
क्यों है यह चिंताजनक? ⚠️
- अब तक माना जाता था कि एचपीवी सिर्फ गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) को प्रभावित करता है।
- शोध में यह साबित हुआ कि यह ओरल कैंसर यानी मुंह और गले के कैंसर का भी कारण हो सकता है।
- भारत में तंबाकू और गुटखा खाने से ओरल कैंसर पहले से बड़ी समस्या है, अब एचपीवी का फैक्टर इसे और खतरनाक बना रहा है।
आगे का महत्व 🔬
- नए बायोमार्कर की मदद से
- कैंसर की स्टेज का जल्दी पता चल सकेगा।
- मरीज के लिए सही टारगेटेड थेरेपी चुनना आसान होगा।
- यह अंदाजा लगाया जा सकेगा कि कैंसर कितनी तेजी से फैल रहा है।
एचपीवी के बारे में 🧫
- यह यौन संचारित वायरस (STI) है।
- त्वचा से त्वचा के अंतरंग संपर्क से फैलता है।
- मस्सों (Warts) और कैंसर का कारण बन सकता है।
- ज्यादातर संक्रमण अपने आप खत्म हो जाते हैं, लेकिन कुछ लंबे समय तक टिके रहते हैं और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
👉 इसका सीधा मतलब यह है कि एचपीवी वैक्सीन सिर्फ गर्भाशय कैंसर ही नहीं बल्कि भविष्य में ओरल कैंसर की रोकथाम में भी मददगार साबित हो सकती है।
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