💥☕ कैशलैस चिकित्सा में रसोइयों को लेकर सरकार का ज्यादा फोकस शिक्षकों अनुदेशकों के साथ मांगी उनकी भी संख्या का ब्यौरा …

🍲 मुख्यमंत्री की घोषणा: अब रसोइयों को भी मिलेगा कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ

लखनऊ।
शिक्षक दिवस (05 सितम्बर 2025) के अवसर पर लोक भवन, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी ने एक ऐतिहासिक घोषणा की थी। इस घोषणा के तहत प्रदेश के शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों के साथ-साथ रसोइयों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किया जाएगा।

👉 यह फैसला खास तौर पर उन मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) बनाने वाले रसोइयों के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहे थे। प्रदेश के लाखों रसोइये, जो न्यूनतम मानदेय पर विद्यालयों में भोजन पकाकर बच्चों को पोषण देने का कार्य करते हैं, अब इलाज के लिए आर्थिक संकट से नहीं जूझेंगे।

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🏥 क्या है कैशलेस चिकित्सा सुविधा?

  • कैशलेस सुविधा का मतलब है कि लाभार्थी को इलाज के समय अस्पताल में नकद पैसे नहीं देने होंगे।
  • प्रदेश सरकार का स्वास्थ्य विभाग पैनल पर शामिल अस्पतालों में सीधे भुगतान करेगा।
  • इससे रसोइयों और अन्य कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों या आकस्मिक स्थितियों में तत्काल राहत मिलेगी।

✍ सरकार ने मांगे विवरण

मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रियान्वयन के लिए शासन ने सभी विभागों से कहा है कि वे अपने-अपने स्तर पर रसोइयों और अन्य कर्मचारियों की संख्या तथा अनुमानित व्यय का विवरण निर्धारित प्रारूप में 15 सितम्बर 2025 तक माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-8 को उपलब्ध कराएँ।
इसमें शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग आदि शामिल हैं।


🍛 रसोइयों के लिए क्यों अहम है यह सुविधा?

  1. कम आय – अधिकांश रसोइये 1,500–2,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय पर काम करते हैं।
  2. स्वास्थ्य समस्याएँ – रसोई के धुएं, गर्मी और लगातार खड़े होकर काम करने से उन्हें अनेक स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं।
  3. इलाज का खर्च – महंगे इलाज के कारण अक्सर रसोइये समय पर उपचार नहीं करा पाते।
  4. सरकारी मान्यता – इस घोषणा से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सरकार रसोइयों को भी शिक्षा परिवार का अहम हिस्सा मानती है।

✨ निष्कर्ष

यह निर्णय न केवल रसोइयों को सम्मान और सुरक्षा देगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका को भी मजबूती से स्थापित करेगा। अब प्रदेश के विद्यालयों में भोजन बनाने वाले रसोइये भी गर्व से कह सकेंगे कि सरकार उनके स्वास्थ्य और जीवन की जिम्मेदारी उठा रही है।

📌 “सरकारी कलम” का मानना है कि यह पहल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी के लिए समानता और सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी छलांग है।


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