⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: रोडवेज में खाली पदों पर होगी नियमित भर्ती, अनुकंपा नियुक्तियां भी नियमों के अनुसार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर चालक और परिचालक के पद खाली हैं तो उनकी नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि हर साल नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्तियां की जानी चाहिए।
📌 मामला क्या है?
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभश्याम शमेशरी की एकल पीठ ने अलीगढ़ की निधि शर्मा और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ताओं की दो प्रमुख मांगें थीं:
- उन्हें अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए।
- 1165 पदों पर एक साथ की जा रही अनुकंपा नियुक्तियों को रद्द किया जाए।
🗣️ याचिकाकर्ताओं की दलीलें
- केवल मृतक आश्रितों की भर्ती करना एक तरह से 100% आरक्षण देने जैसा है, जो संविधान के खिलाफ है।
- इस तरह की प्रक्रिया से निगम में नियमित भर्ती रुक जाती है।
- निधि शर्मा का मामला:
- उनके पिता की मृत्यु 13 अगस्त 2006 को हुई थी।
- उन्होंने बाद में आवेदन किया, लेकिन उनका आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि आवेदन मृत्यु के पांच साल बाद किया गया था।
⚖️ कोर्ट का आदेश
- UPSRTC को खाली पदों पर नियमित भर्ती शुरू करने का निर्देश।
- हर साल नियमित प्रक्रिया से अनुकंपा नियुक्तियां की जाएं।
- अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृतक आश्रित परिवार को तुरंत सहारा देना है, न कि लंबे समय बाद नियुक्ति देना।
📊 असर
- अब रोडवेज में जल्द ही नियमित भर्ती की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
- अनुकंपा नियुक्ति पर भी स्पष्टता आ गई है कि यह संविधान और नियमों के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए।
✍️ निष्कर्ष
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश ने UPSRTC में भर्ती को लेकर नया रास्ता खोल दिया है।
👉 अब नियमित नियुक्तियों का रास्ता साफ होगा और अनुकंपा नियुक्तियां भी केवल नियमों के तहत और समयसीमा में होंगी।
