इलाहाबाद हाईकोर्ट के अहम फैसले: शिक्षकों, अभिभावकों और आम जनता के लिए बड़ी राहत 🏛️⚖️
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कई महत्वपूर्ण मामलों पर ऐतिहासिक फैसले सुनाए। इन निर्णयों का सीधा असर शिक्षकों, अभिभावकों, मातृत्व अधिकारों और नागरिक अधिकारों पर पड़ेगा। आइए जानते हैं प्रमुख फैसलों के बारे में विस्तार से—
तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश पर राहत 👩🏫🤰
बिजनौर की सहायक अध्यापिका अंशुल दत्त को तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश देने से मना कर दिया गया था। बीएसए का कहना था कि दो जीवित बच्चों के बाद अवकाश का प्रावधान नहीं है।
- कोर्ट का फैसला: हाईकोर्ट ने बीएसए का आदेश रद्द किया और चार सप्ताह में नया आदेश देने के निर्देश दिए।
- न्यायमूर्ति: मंजू रानी चौहान।
- महत्त्व: महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों को मजबूती।
धर्मांतरण मामलों में पुलिस को नसीहत 🚔📜
बरेली में महमूद बेग मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस को स्पष्ट संदेश दिया कि धर्मांतरण हो या कोई अन्य मामला, कार्रवाई हमेशा कानून के दायरे में रहकर होनी चाहिए।
- महमूद बेग पर दृष्टिहीन लड़की का अवैध धर्मांतरण कराने का आरोप।
- कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने महमूद बेग को पेश किया।
गैंगस्टर एक्ट का दुरुपयोग रोका गया 🚫👥
बरेली के एलायंस बिल्डर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स लिमिटेड के एमडी अरविंदर सिंह और निदेशक रमनदीप पर लगाए गए गैंगस्टर एक्ट को कोर्ट ने रद्द कर दिया।
- कोर्ट का कहना: एक ही मुकदमे के आधार पर गैंगस्टर लगाना कानून का दुरुपयोग है।
- जज: न्यायमूर्ति राजीव मिश्र।
डीएम चित्रकूट को अवमानना नोटिस 📄⚠️
चित्रकूट के डीएम शिवशरप्पा जीएन को आदेश की अवहेलना पर नोटिस जारी किया गया।
- कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जाए।
अब्बास अंसारी ने मांगी विधायकी बहाली 🗳️📢
हेट स्पीच मामले में दो साल की सजा पर रोक लगने के बाद पूर्व विधायक अब्बास अंसारी ने अपनी विधायकी बहाल करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
उमर अंसारी की जमानत पर सुनवाई टली ⏳
धोखाधड़ी के मामले में उमर अंसारी की जमानत अर्जी नियमित कोर्ट को भेजी गई। अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।
जुड़वां बच्चियों की पेशी का आदेश 👧👧
आज़मगढ़ के मामले में कोर्ट ने नाना-नानी को आदेश दिया कि वे जिकरा बानो और इकरा बानो को 16 सितंबर को कोर्ट में पेश करें।
- याचिकाकर्ता का कहना: मां ने दूसरी शादी कर ली है और नाना-नानी ने बच्चियों को अवैध रूप से रोका है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के ये फैसले दिखाते हैं कि न्यायपालिका न केवल कानून की रक्षा कर रही है बल्कि शिक्षकों, अभिभावकों और आम जनता के अधिकारों को भी मजबूत कर रही है।
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