बीएसए पर कोर्ट की सख्ती: आदेश का पालन न करने पर होगी चार्जशीट! ⚖️
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अमित कुमार सिंह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। माननीय न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने स्पष्ट किया कि यदि 18 नवंबर 2024 के रिट कोर्ट के आदेश का पालन निर्धारित समय सीमा में नहीं किया गया, तो उन पर चार्ज तय किए जाएंगे और कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।
मामला क्या है?
मामला ओम नारायण सिंह (सुप्रा) के फैसले के अनुपालन से जुड़ा है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के सिविल अपील नंबर 2471/2023 (The Director KPTCL & Ors. बनाम C.P. Mundiramani) पर आधारित है। इस फैसले में बढ़ी हुई पेंशन 01 मई 2023 से लागू करने का प्रावधान स्पष्ट किया गया था।
आवेदक ने भी इसी आधार पर अपना प्रकरण प्रस्तुत किया था, लेकिन विभाग ने इसे सरकारी आदेशों के आधार पर निपटाया, न कि ओम नारायण सिंह (सुप्रा) के अनुसार, जिससे आदेश की अवहेलना हुई।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने पाया कि मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। 12 अगस्त 2025 को दायर दूसरी अनुपालन शपथपत्र पर भी संतोषजनक कार्यवाही नहीं दिखी। जब कोर्ट ने चार्ज फ्रेम करने की बात कही, तब बीएसए ने तीन सप्ताह का समय मांगा और यह आश्वासन दिया कि वह रिट कोर्ट के आदेश का पूर्ण पालन करेंगे तथा यदि कोई भुगतान बकाया होगा तो समय से कर देंगे।
अगली सुनवाई
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2025 को निर्धारित की है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो बीएसए को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा और उनके खिलाफ चार्ज तय होंगे।
सरकारी कलम का दृष्टिकोण:
यह मामला दिखाता है कि सरकारी आदेशों की अनदेखी अब अधिकारियों को भारी पड़ सकती है। शिक्षकों और कर्मचारियों को उनका न्यायोचित हक समय से मिले, इसके लिए न्यायपालिका का यह हस्तक्षेप सराहनीय है। ✍️
