संविदाकर्मियों के भविष्य पर सवाल – स्थाई की माँग इलाहाबाद सांसद ने उठाई आवाज 🩺

क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के संविदाकर्मियों के भविष्य पर सवाल – इलाहाबाद सांसद ने उठाई आवाज 🩺

भारत को 2025 के अंत तक क्षय रोग मुक्त घोषित करने के सरकारी लक्ष्य के बीच, इस अभियान में वर्षों से कार्यरत संविदाकर्मियों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


इलाहाबाद सांसद उज्ज्वल रमण सिंह का बयान

सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा:

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  • 15–20 वर्षों से राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) में समर्पित हजारों संविदाकर्मी लगातार काम कर रहे हैं।
  • इन कर्मियों का भविष्य अनिश्चित है, जिससे वे मानसिक तनाव और असुरक्षा की स्थिति में हैं।
  • कार्य क्षमता पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।

प्रमुख चिंताएं क्या हैं?

  • क्षय रोग मुक्त भारत की घोषणा के बाद इनकी सेवाएं जारी रहेंगी या समाप्त कर दी जाएंगी, यह स्पष्ट नहीं है।
  • यदि सेवाएं समाप्त होती हैं, तो क्या अन्य स्थान पर समायोजन होगा?
  • क्या इनकी सेवाओं में गुणात्मक सुधार या स्थायी नियुक्ति का विकल्प मिलेगा?

सांसद की मांग

उज्ज्वल रमण सिंह ने सरकार से आग्रह किया है कि:

  • संविदाकर्मियों को स्थाई नियुक्ति प्रदान की जाए।
  • उनकी सेवाओं को महत्व देते हुए भविष्य की स्पष्ट नीति तैयार की जाए।
  • उत्तर प्रदेश समेत देशभर में हजारों संविदाकर्मियों के जीवन और रोजगार को सुरक्षित किया जाए।

क्यों जरूरी है यह कदम?

इन संविदाकर्मियों ने वर्षों तक क्षय रोग उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि उनका भविष्य सुनिश्चित नहीं किया गया तो इससे न केवल उनके परिवार प्रभावित होंगे बल्कि कार्यक्रम की गुणवत्ता और स्थायित्व पर भी असर पड़ेगा।


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