📰 गुरुजी अब नहीं दे पाएंगे बच्चों को शारीरिक या मानसिक दंड — बेसिक शिक्षा विभाग का सख्त आदेश

📰 गुरुजी अब नहीं दे पाएंगे बच्चों को शारीरिक या मानसिक दंड — बेसिक शिक्षा विभाग का सख्त आदेश
✍️ By सरकारी कलम


प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में अब बच्चों को फटकारना, पीटना, चिकोटी काटना, अपमानित करना या किसी भी तरह का शारीरिक व मानसिक दंड देना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के निर्देशों का हवाला देते हुए आदेश जारी किया है कि सभी विद्यालय इन नियमों का सख्ती से पालन करें और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करें।


🚫 ये सभी कार्य अब प्रतिबंधित

महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों, छात्रावासों, जेजे होम्स और बाल संरक्षण गृहों में अब किसी भी छात्र के साथ निम्नलिखित कार्य नहीं किए जाएंगे—

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  • शारीरिक दंड: मारना, चपत लगाना, चिकोटी काटना, चाटा मारना, घुटनों के बल बैठाना, परिसर में दौड़ाना।
  • मानसिक उत्पीड़न: अपमानित करके नीचा दिखाना, कक्षा में अकेले बंद करना।
  • गंभीर अपराध: यौन शोषण, प्रताड़ना, बिजली का झटका देना, जाति-धर्म-लिंग आधारित भेदभाव।

इनमें से किसी भी नियम का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।


📢 बच्चों की आवाज़ अब होगी बुलंद

विभाग ने सभी BSA (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी) को निर्देश दिए हैं कि—

  1. हर स्कूल, छात्रावास और बाल संरक्षण गृह में शिकायत पेटिका लगाई जाए।
  2. बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जाए, ताकि वे किसी भी प्रकार के दंड या उत्पीड़न के विरोध में शिकायत दर्ज कर सकें।
  3. आवश्यकता पड़ने पर एनजीओ की मदद ली जाए।

☎️ टोल फ्री नंबर से मिलेगी मदद

बच्चों और अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए टोल फ्री नंबर 1800-889-3277 शुरू किया गया है।

  • यह नंबर सभी स्कूलों के नोटिस बोर्ड और मुख्य प्रवेश द्वार पर साफ़-साफ़ लिखा जाएगा।
  • प्राप्त शिकायतों की निगरानी व त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

📊 शिकायतों की समीक्षा व्यवस्था

  • अभिभावक-शिक्षक समिति (PTA) समय-समय पर शिकायतों की समीक्षा करेगी।
  • ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर बच्चों की शिकायतों व उन पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड रखा जाएगा।

🏫 आरटीई का पालन अनिवार्य

बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि Right to Education (RTE) Act के नियमों का पालन करते हुए किसी भी बच्चे के साथ—

  • शारीरिक दंड
  • मानसिक उत्पीड़न
  • जाति, धर्म, लिंग आधारित भेदभाव
    किसी भी रूप में नहीं किया जाएगा।

💬 सरकारी कलम की राय:
यह कदम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। अब जरूरत है कि इन नियमों का जमीनी स्तर पर सख्ती से पालन हो और बच्चों को सुरक्षित व सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा मिल सके।


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