डायट में गूंजेगी बच्चों की किलकारी 👧🏻👦🏻: अब शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में खुलेंगी मॉडल बाल वाटिकाएं!


📰 सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट

🗓 25 जुलाई 2025
✍️ लेखक: सरकारी कलम टीम


डायट में गूंजेगी बच्चों की किलकारी 👧🏻👦🏻: अब शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में खुलेंगी मॉडल बाल वाटिकाएं!

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश एक नई क्रांति की ओर बढ़ रहा है। जहां अब शिक्षक सिर्फ किताबों से नहीं, बच्चों की मुस्कान से भी सीखेंगे। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में “मॉडल बाल वाटिकाएं” खोलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसमें 5 से 6 वर्ष के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

यह कदम ना सिर्फ बाल शिक्षा को सशक्त बनाएगा, बल्कि भावी शिक्षकों को प्रायोगिक प्रशिक्षण का भी अवसर देगा। यह प्रयोग शिक्षा मंत्रालय, एससीईआरटी, बेसिक शिक्षा विभाग, और बाल विकास पुष्टाहार विभाग के संयुक्त प्रयास से शुरू हो रहा है।


🎯 दोहरा उद्देश्य, बहुपक्षीय लाभ

सभी डायट में डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (D.El.Ed) संचालित होता है, जो युवाओं को शिक्षक बनने के लिए तैयार करता है। अब जब इन संस्थानों में ही बच्चों की कक्षाएं चलेंगी, तो प्रशिक्षु शिक्षक पठन-पाठन, बाल मनोविज्ञान और व्यवहारिक शिक्षण को प्रत्यक्ष रूप से समझ पाएंगे।

📌 इस योजना से दो प्रमुख फायदे होंगे:

  1. शिक्षकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण मिलेगा, जो सिर्फ कक्षा-शास्त्र तक सीमित नहीं रहेगा।
  2. डायट के शैक्षणिक संसाधनों — जैसे स्मार्ट क्लास, लैब, सेमिनार हॉल — का बच्चों के लिए उपयोग हो सकेगा।

🏫 पहले चरण में “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” बन रहे 28 डायट

योजना की शुरुआत पहले चरण में 28 डायट को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाकर की जा रही है। इनमें अलीगढ़, आगरा, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, कानपुर देहात, गोरखपुर, जौनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, बाराबंकी जैसे जिले शामिल हैं। इन संस्थानों को अत्याधुनिक सुविधाओं से सज्जित किया जा रहा है —
🎓 स्मार्ट क्लास
🏢 ऑडिटोरियम
🏠 छात्रावास
🔬 STEM लैब
☀️ सोलर एनर्जी सिस्टम

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इसके लिए कुल ₹103 करोड़ (पहले चरण) और ₹170 करोड़ (दूसरे चरण) का बजट स्वीकृत किया गया है।


🌱 बाल वाटिका: आंगनबाड़ी और परिषदीय विद्यालयों से भी जुड़ाव

राज्य परियोजना कार्यालय के अनुसार, बाल वाटिकाओं के संचालन में आस-पास के आंगनबाड़ी केंद्रों को भी शामिल किया जाएगा। इतना ही नहीं, हाल में जिन 10827 परिषदीय विद्यालयों का विलय किया गया है, उनमें से खाली हुए भवनों का उपयोग भी बाल वाटिका के रूप में किया जाएगा। यह न सिर्फ संसाधनों का बेहतर उपयोग है, बल्कि शिक्षा पहुंच को और सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावशाली कदम है।


🗣️ अधिकारियों का क्या कहना है?

महानिदेशक स्कूल शिक्षा, कंचन वर्मा की अध्यक्षता में इस परियोजना को लेकर बैठक हो चुकी है और इसे प्राथमिकता से लागू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

वहीं एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने कहा —

“यह बाल वाटिकाएं न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाएंगी, बल्कि पूरे जिले के लिए आदर्श मॉडल बनेंगी। यहां से सीखकर अन्य संस्थान भी इसी प्रकार की व्यवस्था अपना सकेंगे।”


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🔔 आप क्या सोचते हैं?
क्या बाल वाटिकाओं को सभी प्रशिक्षण संस्थानों में अनिवार्य कर देना चाहिए?
क्या इससे सरकारी शिक्षक और बच्चों के बीच की दूरी घटेगी?

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🌐 अपडेट्स के लिए विजिट करें: www.sarkarikalam.com


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