⚠️ उपराष्ट्रपति धनखड़ का अचानक इस्तीफा: पूरे देश को चौंकाया 🇮🇳
खराब स्वास्थ्य और डॉक्टरों की सलाह को बताया कारण, संसद सत्र के पहले ही दिन मचा हलचल
📌 सोमवार रात लिया गया बड़ा फैसला
नई दिल्ली: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। यह निर्णय संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लिया गया, जब वे दिनभर राज्यसभा में सक्रिय भी रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने त्यागपत्र में धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और चिकित्सकों की सलाह को प्राथमिकता देने का हवाला दिया है।
🩺 स्वास्थ्य को बताया इस्तीफे का कारण
74 वर्षीय धनखड़ ने कहा कि वे चिकित्सकों की सलाह और व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने लिखा:
“मैं उन सभी सांसदों का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने मुझे यह गरिमा और विश्वास सौंपा। यह मेरी यादों में सदा रहेगा।”
📜 राजनीतिक सफर और योगदान
धनखड़ को 2022 में देश का 14वां उपराष्ट्रपति चुना गया था। इससे पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श का नेतृत्व किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें “भारत की कानूनी और आर्थिक शक्ति का प्रतीक” बताया था। उन्होंने लिखा कि धनखड़ का अनुभव और विचारशीलता भारत के भविष्य निर्माण में योगदान देंगे।
⚔️ राज्यसभा में विपक्ष से होते रहे मतभेद
उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ का कार्यकाल विपक्ष के साथ कई बार टकराव भरा रहा। उनके खिलाफ विपक्षी दलों ने अभियोग प्रस्ताव तक पेश किया था, हालांकि कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उनके अचानक हटने को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है।
📅 2027 तक था कार्यकाल
धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने इसे दो साल पहले ही छोड़ दिया। वे पहले ऐसे उपराष्ट्रपति बने हैं जिन्होंने स्वेच्छा से कार्यकाल समाप्त किया।
राजस्थान के झुंझुनू जिले से ताल्लुक रखने वाले धनखड़ मेयो कॉलेज और राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र रहे हैं और उन्होंने वकालत से राजनीति में कदम रखा था।
