अब कोई छात्र नहीं रहेगा ‘पीछे’! – केरल के स्कूलों में ‘यू-शेप’ क्लासरूम व्यवस्था की शुरुआत
✍️ सरकारी कलम | शिक्षा विशेष रिपोर्ट
🎬 एक फिल्म से शुरू हुआ विचार अब शिक्षा में क्रांति बन गया है!
निर्देशक विनेश विश्वनाथ की चर्चित मलयालम फिल्म “स्थानार्थी श्रीकुट्टन” (Sthanarthi Sreekuttan) अब सिर्फ एक फिल्म नहीं रही — ये एक शिक्षा सुधार आंदोलन की प्रेरणा बन गई है।
🪑 क्या है ‘यू-शेप क्लासरूम’ मॉडल?
यह एक नयी क्लासरूम व्यवस्था है जिसमें बच्चे अंग्रेजी अक्षर ‘यू’ (U) के आकार में बैठते हैं। इसका उद्देश्य हर छात्र को बराबर महत्व देना और शिक्षक की पहुंच सभी तक सुनिश्चित करना है।
✅ हर छात्र दिखेगा, हर छात्र सुना जाएगा।
✅ कोई भी बच्चा “बैकबेंचर” नहीं कहलाएगा।
🎓 फिल्म से स्कूलों तक: प्रेरणा की यात्रा
फिल्म में श्रीकुट्टन नाम का एक बच्चा कक्षा में ‘पीछे’ बैठने का कलंक मिटाने के लिए यह व्यवस्था सुझाता है।
और अब यह विचार वास्तविक जीवन के स्कूलों में लागू किया जा रहा है।
🎥 निर्देशक विनेश विश्वनाथ कहती हैं:
“यह सिर्फ एक सरल सोच थी — लेकिन हमें अंदाजा नहीं था कि यह स्कूलों को बदलने का जरिया बन जाएगी।“
उन्होंने बताया कि कुछ स्कूल पहले से इस मॉडल को प्रयोग में ला रहे थे, पर अब यह व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है।
📚 क्या हैं फायदे इस नई व्यवस्था के?
👁️🗨️ शिक्षक हर बच्चे को आसानी से देख सकते हैं
👣 शिक्षक छात्रों के पास जाकर संवाद कर सकते हैं
💬 छात्रों को बोलने, पूछने और भागीदारी का मौका ज्यादा मिलता है
🧠 बच्चों में आत्मविश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है
🚫 ‘पीछे बैठने वाला कमजोर है’ जैसी धारणा खत्म होती है
🏫 केरल बना शिक्षा नवाचार का मॉडल
केरल हमेशा से शिक्षा सुधारों में अग्रणी रहा है। ‘यू-शेप क्लासरूम’ से एक बार फिर यह साबित हो रहा है कि:
सिर्फ पाठ्यक्रम बदलने से नहीं, क्लासरूम का माहौल बदलने से भी शिक्षा में क्रांति लाई जा सकती है।
📌 सरकारी कलम की राय:
दूसरे राज्यों को भी इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अपनाना चाहिए। इससे सरकारी स्कूलों की छवि और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों सुधर सकती हैं।
📣 अब सवाल सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बैठने के तरीके का भी है!
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