यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS): क्या सच में बेहतर विकल्प या एक और छलावा?
🖊️ लेख: सरकारी कलम टीम
📅 तिथि: 11 जुलाई 2025
🔍 प्रस्तावना
प्रदेश सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को 1 अगस्त से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। UPS को एनपीएस (NPS) के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत और कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया इस पर कई सवाल खड़े कर रही है।
📊 UPS में क्या मिलेगा?
- 10 वर्ष की सेवा पर न्यूनतम ₹10,000 मासिक पेंशन।
- 25 वर्ष की सेवा पर रिटायरमेंट के समय की अंतिम 12 माह की औसत बेसिक सैलरी पर आधारित पेंशन।
- रिटायरमेंट पर एकमुश्त राशि, जो हर 5 वर्ष में बढ़ती है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी की बेसिक सैलरी ₹45,000 और डीए ₹23,850 है, तो कुल ₹68,850 के आधार पर 25 वर्षों की सेवा पर 5 गुना = ₹3,44,250 मिलेगा।

❌ UPS की कमियां और सवाल
- 🔹 मेडिकल सुविधा का कोई उल्लेख नहीं
रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी की सबसे बड़ी ज़रूरत होती है स्वास्थ्य सुविधाएं, लेकिन अधिसूचना में इसका कोई जिक्र नहीं है। - 🔹 एनपीएस में जमा राशि का क्या होगा?
कर्मचारियों के सालों से जमा हजारों-लाखों रुपये का कोई ज़िक्र नहीं किया गया है कि उसे कैसे समायोजित किया जाएगा। - 🔹 ग्रेच्युटी और लीव एन्कैशमेंट पर चुप्पी
क्या UPS में ये सुविधाएं मिलेंगी या नहीं — इस पर अधिसूचना मौन है।
📣 कर्मचारी संगठनों का विरोध
पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने UPS को “OPS की आड़ में एक और धोखा” बताया है।
प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल का कहना है कि —
“हमारी मांग स्पष्ट है — केवल OPS (पुरानी पेंशन योजना) की बहाली। UPS भ्रम फैलाने वाला विकल्प है। 1 अगस्त को ब्लैक डे मनाया जाएगा।”
🌐 देशव्यापी हड़ताल: 25 करोड़ कर्मचारी व किसान एकजुट
- 12 में से 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन, जैसे सीटू, एटक, इंटक आदि UPS और श्रम कोड्स के खिलाफ हड़ताल पर हैं।
- 17 सूत्रीय मांग पत्र में शामिल हैं:
- पुरानी पेंशन योजना की बहाली।
- न्यूनतम वेतन ₹26,000।
- फिक्स्ड टर्म रोजगार की वापसी।
- ईपीएफ पेंशन ₹9,000 मासिक।
- MSP कानून लागू करना।
🧠 निष्कर्ष: UPS – समाधान या रणनीतिक भ्रम?
UPS को सुनकर पहले पहल राहत की सांस ली जा सकती है, लेकिन जब इसकी तुलना OPS से की जाती है तो यह ‘ना घर का ना घाट का’ वाली स्थिति प्रतीत होती है। OPS में गारंटीड पेंशन, डीए पर आधारित वृद्धि, पारिवारिक पेंशन और मेडिकल सुविधा जैसी बातों का स्पष्ट उल्लेख था — UPS में नहीं।
सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शी संवाद, स्पष्ट नीति और कर्मचारी हित में ठोस निर्णय ले। नहीं तो यह विरोध और असंतोष की आग को और भड़का सकता है।
✍️ आप क्या सोचते हैं? UPS एक समाधान है या सिर्फ OPS से ध्यान भटकाने की रणनीति? नीचे कमेंट करें और इस लेख को अपने शिक्षक साथियों तक ज़रूर पहुँचाएँ।
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