📊 आँकड़ों को लेकर हुई गलतफहमी – ‘जागरण’ करता है शिक्षकों का सम्मान🙏

📊 आँकड़ों को लेकर हुई गलतफहमी – ‘जागरण’ करता है शिक्षकों का सम्मान 🙏

📅 प्रकाशित तिथि: 10 जुलाई
📰 स्रोत: दैनिक जागरण (झांसी संस्करण)


🔍 क्या था मामला?

10 जुलाई को प्रकाशित एक समाचार “परेशान: बच्चों की हुई, शिक्षकों को नहीं” में कुछ आँकड़ों को लेकर गलतफहमी उत्पन्न हो गई थी। यह खबर परीक्षाओं की स्थिति और परिणामों को लेकर थी, जो राज्य स्तर पर भेजे गए आदेशों के संदर्भ में तैयार की गई थी।

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रिपोर्ट में यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि कैसे “असमान्य परिस्थितियों” में परीक्षाएं हुईं और कुछ विद्यालयों के शिक्षकों की भूमिका अस्पष्ट रही। लेकिन इसका उद्देश्य किसी भी शिक्षक का अपमान करना नहीं था। यह सिर्फ प्रशासनिक आदेशों की स्थिति स्पष्ट करने का एक प्रयास था।

🎓 शिक्षक समाज के लिए ‘जागरण’ का सम्मान

‘जागरण’ सदैव शिक्षकों के योगदान को सम्मान की दृष्टि से देखता है। शिक्षक समाज का वह स्तंभ हैं, जिनके बिना राष्ट्र की प्रगति अधूरी है। कोरोना काल जैसे कठिन समय में भी शिक्षकों ने ऑनलाइन माध्यम से बच्चों की शिक्षा को जारी रखा – इसके लिए वे साधुवाद के पात्र हैं।

इस खबर में दी गई “कुछ नहीं, आओ और घर जाओ” जैसी स्थिति के उदाहरण प्रशासनिक जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए थे – न कि शिक्षकों की कार्यक्षमता पर कोई सवाल उठाने के लिए।

💡 स्थिति अब स्पष्ट है

विद्यालयों में दी जाने वाली परीक्षा का प्रति प्रश्न मूल्य लगभग 40 से 50 रुपए के बीच होता है, जोकि समुचित रूप से शिक्षकों को दिया गया है। इस संदर्भ में किसी प्रकार की भ्रामक जानकारी फैलाई गई हो तो ‘जागरण’ उसके लिए खेद व्यक्त करता है।

इस मुद्दे पर जो भी शिक्षक, संस्था या अभिभावक असमंजस में थे, उनसे ‘जागरण’ स्पष्ट करता है कि उसका उद्देश्य कभी किसी शिक्षक का अपमान करना नहीं रहा है।

📝 संपादक की ओर से: शिक्षक समाज हमारे देश का गौरव हैं और ‘जागरण’ सदैव उनके योगदान का सम्मान करता आया है और करता रहेगा। किसी भी प्रकार की गलतफहमी के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं।

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