📚 RTE में बंधे शिक्षक, NEP में बहा स्कूल!
समायोजन में RTE की दुहाई, मगर मर्जर में NEP की दुहाई — दोहरे मापदंड क्यों?
जहाँ शिक्षकों के समायोजन और नियुक्तियों में Right to Education (RTE) Act की शर्तों का हवाला देकर उनकी नियुक्ति, सेवा स्थान और योग्यता को कानूनी ढांचे में बाध्य किया जा रहा है, वहीं विद्यालयों के मर्जर के मामले में अचानक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू कर दिया गया।
इसका तात्पर्य ये है कि:
- जब शिक्षक को हटाना हो, तब RTE लागू।
- जब स्कूलों को बंद करना हो, तब NEP लागू।
- और जब छात्रों के परिवहन, दूरी और सुविधा की बात हो, तब कोई भी कानून लागू नहीं।
क्या यही है “न्याय”?
क्या यही है शिक्षा में सुधार?
या यह केवल नीतियों की मनमानी व्याख्या है, ताकि जो निर्णय ऊपर से लिए गए हों, उन्हें वैध ठहराया जा सके?
📌 यह मुद्दा केवल शिक्षकों का नहीं, लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का भी है, जो अपने गाँवों में स्कूल बंद होने से शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
🛑 नीतियों की चयनात्मक व्याख्या बंद होनी चाहिए। जब छात्रों के अधिकार की बात हो, तब भी NEP और RTE दोनों की असली भावना का पालन हो।
