⚠️ पांचवीं के छात्र ने चाकू से किया हमला, तमंचा लेकर दोबारा पहुंचा स्कूल 😱
स्थान: छपरौली (बागपत) | रिपोर्ट: संवाददाता
📚 होमवर्क न दिखाने पर बढ़ी बात, चाकू निकाला स्कूल बैग से
बताया गया कि दोनों छात्रों में होमवर्क कॉपी दिखाने को लेकर बहस हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि एक छात्र ने गुस्से में अपने स्कूल बैग से चाकू निकाला और दूसरे छात्र पर हमला कर दिया।
चाकू सीधे छात्र की आंख के नीचे जा लगा, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया। गनीमत रही कि चाकू आंख में नहीं लगा, वरना गंभीर क्षति हो सकती थी।
👩🏫 शिक्षिका ने भेजा घर, लेकिन बच्चा लौटा तमंचे के साथ 🔫
घायल छात्र की जानकारी पर शिक्षिका ने हमलावर छात्र को डांटा और उसके परिजनों को बुलाने के लिए घर भेज दिया। लेकिन चौंकाने वाली बात ये रही कि छात्र घर से परिजन नहीं, बल्कि तमंचा और दो जिंदा कारतूस लेकर लौट आया।
छात्र ने कक्षा में पहुंचते ही घायल छात्र को तमंचा दिखाकर गोली मारने की धमकी दी। इससे पूरे विद्यालय में हड़कंप मच गया। शिक्षकों और छात्रों में दहशत फैल गई।
🚨 अब सवाल – बच्चों के हाथों में हथियार कैसे? 🤔
यह घटना न केवल शिक्षा व्यवस्था पर, बल्कि बच्चों की मानसिक स्थिति और घरेलू परिवेश पर भी गंभीर प्रश्न उठाती है। आखिर एक 10-12 साल का बच्चा चाकू और तमंचा जैसे घातक हथियार कैसे प्राप्त कर रहा है? क्या उसके घर या आसपास का माहौल ही उसे हिंसक बना रहा है?
🔍 सहारनपुर में भी छात्र की चाकुओं से हत्या 🩸
इसी दिन सहारनपुर जिले में भी एक कक्षा 11 के छात्र प्रिंस (16) की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई। शव गांव डाल्लेवाला के बाहर चकरोड़ पर पड़ा मिला। उसके पास ही उसकी साइकिल भी पड़ी थी। छात्र खेत में जाने के लिए निकला था और फिर वापस नहीं लौटा।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इन दोनों मामलों से यह स्पष्ट होता है कि छात्रों में हिंसा और हथियारों की पहुंच एक बड़ा खतरा बनती जा रही है।
📢 समाज और अभिभावकों की जिम्मेदारी 🙏
बच्चों में बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए स्कूल प्रशासन के साथ-साथ अभिभावकों और समाज की भी बड़ी जिम्मेदारी है। बच्चों को संवाद, अनुशासन और गंभीर विषयों की समझ बचपन से ही देना होगा ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
