🏫 बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के विलय पर हाईकोर्ट की मुहर ✅
स्कूलों के विलय के खिलाफ दाखिल याचिकाएं खारिज, बच्चों के शिक्षा अधिकार को कोई नुकसान नहीं: कोर्ट
⚖️ हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी राहत देते हुए
बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के विलय को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत बच्चों को निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा
के अधिकार को ध्यान में रखते हुए सुनाया गया।
👩⚖️ कोर्ट का तर्क: “एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए”
याचिकाओं में कहा गया था कि स्कूलों का विलय बच्चों के लिए असुविधाजनक होगा, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि
अगर एक किलोमीटर के दायरे में कोई स्कूल मौजूद है, तो बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी।
कोर्ट ने 51 बच्चों से संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए संपूर्ण निर्णय सुरक्षित कर लिया।
📚 सरकार की रणनीति को न्यायालय ने ठहराया सही
सरकार की यह योजना है कि एक किलोमीटर के दायरे में अगर कोई स्कूल नहीं है, तो वहां
नए स्कूल की स्थापना की जाएगी। कोर्ट ने सरकार की इस नीति को संविधान सम्मत और बच्चों
के हित में बताया। साथ ही यह भी कहा गया कि राज्य सरकार का यह अधिकार है कि
स्कूलों का विलय या स्थानांतरण कैसे किया जाए।
📊 8 लाख स्कूलों की ज़रूरत से बचाएगा विलय
अदालत ने यह भी कहा कि यदि सरकार इस विलय प्रक्रिया को न अपनाती, तो
लगभग 8 लाख नए स्कूल खोलने पड़ते, जिससे बजट और संसाधनों पर भारी दबाव आता।
इसलिए स्कूल मर्जर नीति एक व्यावहारिक और दूरदर्शी कदम है।
🚸 शिक्षा के अधिकार को नहीं होगा कोई नुकसान
कोर्ट ने साफ किया कि अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत किसी भी बच्चे को वंचित नहीं किया जा सकता।
यदि कोई विद्यालय एकीकृत किया जा रहा है, तो सरकार उसकी निकटतम लोकेशन पर नया विकल्प
प्रदान करेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बुनियादी
ढांचे और संसाधनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
