प्रयागराज: साइबर ठगी से आहत प्रतियोगी छात्रा ने की आत्महत्या, 70 हजार रुपये खाते से कटे
प्रयागराज, 12 जून 2025 – बलिया जिले की रहने वाली एक 20 वर्षीय प्रतियोगी छात्रा दिव्यांशी ने साइबर ठगी का शिकार होने के बाद शिवकुटी थाना क्षेत्र स्थित किराए के कमरे में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। दिव्यांशी प्रयागराज के गोविंदपुर इलाके में रहकर आगामी पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रही थी।
📌 क्या हुआ था?
दिव्यांशी के छोटे भाई दिव्यांशु के अनुसार, बुधवार को एक अज्ञात नंबर से आए लिंक पर क्लिक करते ही दिव्यांशी के खाते से ₹70,000 रुपये कट गए। यह वही खाता था जिसमें पिता की सैलरी आती थी। साइबर ठगी से वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी।
उसने ठगी की जानकारी पिता को दी थी, जिन्होंने समझाकर उसे बैंक में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। लेकिन अगले दिन गुरुवार की सुबह, मकान मालिक द्वारा सूचना दिए जाने पर जब पुलिस कमरे में पहुंची तो दरवाजा बंद था। दुपट्टे के सहारे पंखे से लटकी मिली दिव्यांशी की लाश ने सबको झकझोर दिया।
🏠 15 दिन पहले ही लौटी थी प्रयागराज
- दिव्यांशी मूल रूप से बलिया के खलीलपुर (रसड़ा थाना क्षेत्र) की निवासी थी।
- वह 15 दिन पहले ही घूमकर घर से लौटी थी।
- पिछले एक वर्ष से प्रयागराज में रहकर पढ़ाई कर रही थी।
- उसने एसएससी की कोचिंग करने के बाद अब ऑनलाइन क्लासेस से सेल्फ स्टडी शुरू की थी।
💔 परिवार टूट चुका है, कोई सुसाइड नोट नहीं मिला
इंस्पेक्टर रुकुम पाल सिंह ने बताया कि:
“कमरा अंदर से बंद था। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। दिव्यांशी के फोन की सीडीआर (Call Data Record) निकलवाई जा रही है। फिलहाल परिवार से कोई तहरीर नहीं मिली है।”
⚠️ साइबर अपराधियों पर कार्रवाई की मांग
छात्रा के चचेरे भाई निमित और परिवार ने मांग की है कि:
- साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
- ऐसे अपराधों को लेकर सतर्कता और जागरूकता बढ़ाई जाए।
- गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों की मेहनत इस तरह से हाई-टेक ठगों के कारण नष्ट न हो।
📞 ठगी से बचाव के लिए क्या करें? – साइबर थाना इंस्पेक्टर की सलाह
रोहित कुमार तिवारी (इंस्पेक्टर, साइबर थाना) ने आम जनता से अपील की:
“साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराएं नहीं, तुरंत 1930 पर कॉल करें, अपना फोन बंद कर दें और 24 घंटे के अंदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं। ऐसा करने पर 70% से ज्यादा मामलों में पैसा वापस मिल जाता है।”
🕯️ Sarkari Kalam की श्रद्धांजलि:
दिव्यांशी जैसी हजारों छात्राएं कम संसाधनों में बड़ा सपना लेकर शहरों में आती हैं। लेकिन जब सिस्टम उन्हें सुरक्षा नहीं देता, तो वे अपराधियों का आसान निशाना बन जाती हैं।
यह सिर्फ एक छात्रा की नहीं, हमारे सिस्टम की हार है।
