हाईकोर्ट ने श्रावस्ती के 27 मदरसों को ढहाने पर लगाई रोक
लखनऊ: लखनऊ स्थित उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने श्रावस्ती जनपद के 27 मदरसों को गिराने या उनके संचालन पर रोक लगाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इन मदरसों के खिलाफ जारी नोटिसों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई करते हुए 3 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
🕌 धार्मिक शिक्षा पर रोक या प्रशासनिक चूक?
मदरसों में धार्मिक शिक्षा बंद करने को लेकर प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिसों को “बिना सोच-समझ के जारी” बताया गया है। जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अविनाश राज सिंह ने अदालत को बताया कि यह कार्यवाही मौलिक अधिकारों का हनन है और सरकार को धार्मिक संस्थाओं के संचालन में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।
⚖️ कोर्ट की तीखी टिप्पणी
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में “समान दृष्टिकोण” और “पर्याप्त समय” दिया जाना चाहिए। एक अन्य समान मामले में राहत देते हुए कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों को चेताया कि वे धार्मिक शिक्षा को लेकर कोई भी कदम उठाते समय संविधान के अनुरूप सोचें।
📜 क्या था मामला?
श्रावस्ती प्रशासन द्वारा 27 मदरसों को धार्मिक शिक्षण कार्य के आधार पर अवैध घोषित करते हुए उनके संचालन पर आपत्ति जताई गई थी। इन मदरसों को बिना पर्याप्त प्रक्रिया अपनाए नोटिस थमा दिए गए थे, जिससे नाराज होकर प्रबंधन ने कोर्ट की शरण ली।
🔚 निष्कर्ष
हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है बल्कि प्रशासन को भी संदेश देता है कि धार्मिक और शैक्षणिक स्वतंत्रता के मामलों में संवेदनशीलता जरूरी है। अब 3 जुलाई तक सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
