69000 शिक्षक भर्ती घोटाले की परतें खुलने लगीं, वंचित अभ्यर्थी खुद जुटा रहे सबूत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की चर्चित 69000 शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं और नियमों के विपरीत हुई नियुक्तियों की परतें अब अभ्यर्थी खुद खोलने में जुट गए हैं। योग्य होते हुए भी नौकरी से वंचित हुए उम्मीदवार अब भर्ती में हुए गड़बड़झाले के दस्तावेज इकट्ठा कर रहे हैं ताकि दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जा सके।
विशिष्ट बीटीसी मामले के आदेश ने बढ़ाई सक्रियता
हाल ही में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव की ओर से विशिष्ट बीटीसी अभ्यर्थियों से संबंधित जारी आदेश के बाद, पीड़ित अभ्यर्थियों में नई ऊर्जा आई है। उनका मानना है कि यह आदेश इस बात का संकेत है कि विभाग को अब भर्ती में हुई गलतियों का एहसास हो रहा है, लेकिन अब तक कार्रवाई की रफ्तार अत्यंत धीमी रही है।
आरक्षित वर्ग के नेता अमरेंद्र पटेल का आरोप
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की ओर से अमरेंद्र पटेल ने कहा कि:
“इस भर्ती में हजारों अपात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, जबकि कई योग्य अभ्यर्थी नियमों के पालन के बावजूद बाहर कर दिए गए। अगर विभाग ने समय पर कार्रवाई की होती, तो सैकड़ों लोगों को न्याय मिल चुका होता।”
कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी
अभ्यर्थियों को शक है कि कुछ शिक्षा विभाग के अधिकारी अब भी इस मामले को दबाने या लीपापोती करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में अगर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच नहीं हुई, तो अभ्यर्थी इलाहाबाद हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक का रुख करने को तैयार हैं।
कई नियुक्तियां फर्जी अर्हता पर
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ नियुक्त अभ्यर्थियों ने या तो फर्जी अर्हता पत्र, या फिर श्रेणी में हेरफेर कर नौकरी हासिल की। वहीं, कई ऐसे भी हैं जिनके डिग्री व प्रमाणपत्र जांच के दायरे में हैं।
निष्कर्ष:
69000 शिक्षक भर्ती में जो अनियमितताएं उजागर हो रही हैं, वह न केवल शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती हैं, बल्कि हजारों बेरोजगार अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ हुए अन्याय की कहानी भी कहती हैं। अब जब स्वयं अभ्यर्थी सबूत जुटा रहे हैं, तो क्या सरकार और विभाग इनकी आवाज को न्याय दिला पाएंगे?
