बादशाहनगर में 50 साल पुराना प्राइमरी स्कूल तोड़े जाने पर हंगामा: 100 बच्चों की पढ़ाई खतरे में! 🚧📚
लखनऊ। बादशाहनगर रेलवे स्टेशन के चौड़ीकरण और मेट्रो ब्रिज से कनेक्शन की योजना अब बच्चों की शिक्षा पर भारी पड़ती नजर आ रही है। स्टेशन के पास स्थित 50 साल पुराना सरकारी प्राइमरी स्कूल अब तोड़े जाने की कगार पर है, जिससे यहां पढ़ने वाले 100 बच्चों की पढ़ाई अधर में लटक गई है।
रेलवे का तर्क – जर्जर इमारत और विकास कार्य का असर 🏗️
पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से दो बार नोटिस जारी किया गया है, जिसमें बताया गया कि:
- स्कूल की इमारत जर्जर हो चुकी है।
- स्टेशन के विस्तार और मेट्रो स्टेशन से जुड़ने वाले पुल के निर्माण के दौरान कंपन के कारण भवन गिरने का खतरा है।
- स्कूल को तोड़ा जाना जरूरी है।
रेलवे ने साफ किया कि यह ज़मीन रेलवे की है, और पहले भी सहमति से विद्यालय की स्थापना हुई थी।
नया भवन नहीं, सिर्फ तोड़ने की सूचना! ❌🏫
चौंकाने वाली बात यह है कि नोटिस में यह नहीं बताया गया कि स्कूल को कहां शिफ्ट किया जाएगा या बच्चों को कहां पढ़ाया जाएगा।
- प्रधानाध्यापिका अनीता ने बताया कि यहां अधिकतर बच्चे रिक्शा चालक व मजदूर परिवारों से हैं, जो दूसरी जगह भेजने पर पढ़ाई छुड़वा देंगे।
- बीएसए राम प्रवेश ने कहा कि “रेलवे अधिकारियों से बातचीत कर हल निकाला जाएगा।”
- बीईओ प्रमेन्द्र शुक्ला ने सुझाव दिया कि जब तक नया भवन नहीं बनता, रेलवे के सामुदायिक भवन के दो कमरे स्कूल संचालन के लिए दिए जाएं।
बच्चों और अभिभावकों का प्रदर्शन: “स्कूल मत तोड़ो!” ✋