परिषदीय स्कूलों में समर कैंप का आदेश – शिक्षकों में नाराज़गी, शिक्षामित्रों ने जताया विरोध
उत्तर प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस बार गर्मी की छुट्टियों में भी चहल-पहल रहेगी। पहली बार इन स्कूलों में निजी स्कूलों की तर्ज पर समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है।
21 मई से 10 जून तक चलने वाले इस ग्रीष्मकालीन शिविर को लेकर जहां प्रशासन इसे शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल बता रहा है, वहीं शिक्षक और शिक्षामित्र इसे अवकाश पर चोट मानते हुए खुलकर विरोध जता रहे हैं।
“अवकाश में स्कूल क्यों?” – शिक्षकों के सवाल
हर साल जहां गर्मियों की छुट्टियां शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए विश्राम और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर होती थीं, वहीं इस साल बीएसए द्वारा जारी आदेश ने शिक्षकों को असहज कर दिया है।
शिक्षकों का कहना है:
“जब हर साल ग्रीष्मकालीन अवकाश का नियम है, तो फिर छुट्टियों में समर कैंप का आयोजन क्यों?”
“केवल हमें क्यों बुलाया जा रहा है?” – शिक्षामित्रों की पीड़ा
शिक्षामित्रों ने समर कैंप को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अगर यह पहल इतनी ही जरूरी है, तो इसमें सभी शिक्षकों को समान रूप से शामिल किया जाए, सिर्फ शिक्षामित्रों को नहीं।
यह कदम भेदभावपूर्ण और एकतरफा बताया जा रहा है।
बीएसए का आदेश – स्कूल समय पर खुलेंगे, सभी व्यवस्थाएं होंगी मौजूद
बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राम प्रवेश के अनुसार:
- स्कूलों को निर्धारित समय पर खोलना होगा।
- खेल सामग्री, ईको क्लब, टीएलएम, साइंस किट, मैथ्स किट, म्यूजिक सिस्टम और कलर्ड स्केच की व्यवस्था जरूरी होगी।
- प्रमुख जिम्मेदारी प्रधानाध्यापकों की होगी, जो स्कूल संचालन सुनिश्चित करेंगे।
शिक्षक संघों की प्रतिक्रियाएं – सुझाव और चेतावनी दोनों
सुंधाशु मोहन, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ:
“समर कैंप नहीं चलना चाहिए। इस समय भीषण गर्मी होती है। ग्रीष्मावकाश का उद्देश्य ही बच्चों और शिक्षकों को राहत देना है। विभाग को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।”
विनय कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक स्नातक एसोसिएशन:
“अगर शिक्षकों को बुलाना ही है, तो उन्हें उसके बदले अतिरिक्त अवकाश मिलना चाहिए। साल भर में सिर्फ यही छुट्टियाँ होती हैं जिनमें शिक्षक परिवार के साथ समय बिता सकते हैं।”
क्या विभाग ने शिक्षकों की बात सुनी है?
फिलहाल विभाग की ओर से कोई राहत की घोषणा नहीं की गई है। आदेशों के मुताबिक समर कैंप की तैयारियाँ पूरी की जानी हैं और स्कूल निर्धारित समय पर खुलेंगे। पर सवाल यह उठता है कि क्या इस फैसले को शिक्षकों के हितों की अनदेखी कर लिया गया है?
निष्कर्ष: बदलाव ज़रूरी, लेकिन संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण
परिषदीय स्कूलों में समर कैंप की यह पहल रचनात्मक शिक्षा की दिशा में एक नया कदम हो सकती है, लेकिन इसके साथ-साथ यह ज़रूरी है कि शिक्षकों की भावनाओं और ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ न किया जाए।
शिक्षा की नींव शिक्षक हैं – और यदि वे ही असंतुष्ट रहेंगे, तो कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती।
वक्त की मांग है कि विभाग शिक्षकों से संवाद कर, एक संतुलित और न्यायपूर्ण समाधान निकाले।
आप क्या सोचते हैं?
क्या गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप होना चाहिए?
क्या शिक्षकों को इसके लिए अतिरिक्त अवकाश मिलना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं और शिक्षा नीति पर चर्चा का हिस्सा बनें।
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