कंप्यूटर विषय में बीएड अनिवार्यता खत्म करने पर हाईकोर्ट में चुनौती

शिक्षक भर्ती और चयन परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर हाईकोर्ट और आयोग के घेरे में शिक्षा विभाग
प्रयागराज/लखनऊ
उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती और चयन परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बीएड की अनिवार्यता, गलत प्रश्नपत्र, और नियमावली में बदलाव जैसे मुद्दे अब हाईकोर्ट और शिक्षा सेवा आयोग के दरवाज़े खटखटा चुके हैं। यहाँ सभी प्रमुख घटनाक्रमों का सार प्रस्तुत है:


Table of Contents

WhatsApp Channel Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

1. कंप्यूटर विषय में बीएड अनिवार्यता खत्म करने पर हाईकोर्ट में चुनौती

  • उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा सेवा नियमावली 2024 के तहत अब कंप्यूटर विषय में बीएड अनिवार्य नहीं है; केवल अधिमानी अर्हता के रूप में जोड़ा गया है।
  • इससे पहले 2018 की भर्ती में बीएड अनिवार्य था, जिसके चलते 1673 पदों में से 1637 खाली रह गए थे।
  • परवीन सिंह व अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया कि यह निर्णय एनसीटीई की अधिसूचना के विरुद्ध है।
  • हाईकोर्ट ने 13 मई को सरकारी पक्ष से 6 सप्ताह में जवाब मांगा है, अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।

2. प्रवक्ता भर्ती में भी बीएड अनिवार्यता का विरोध

  • प्रतियोगी अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के बाहर प्रदर्शन किया।
  • मांग की गई कि प्रवक्ता पद के लिए भी बीएड को अनिवार्य न बनाया जाए क्योंकि यह अनेकों योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर रहा है।

3. असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप

  • 17 अप्रैल को हुई भर्ती परीक्षा में हिंदी विषय के अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र और उत्तरकुंजी पर आपत्ति दर्ज की है।
  • आरोप है कि परीक्षा में बैठक व्यवस्था (Randomization) का पालन नहीं किया गया और पाठ्यक्रम को नजरअंदाज किया गया।
  • इकाई 8 और 9 जैसे व्यापक हिस्सों से केवल 2-2 प्रश्न पूछे गए, वहीं कुछ प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर और पूरी तरह गलत थे।
  • अभ्यर्थियों ने आयोग के अध्यक्ष-सचिव को ज्ञापन सौंपा और न्यायिक जांच की मांग की।

निष्कर्ष

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और शुचिता को लेकर बार-बार उठते सवाल अब कोर्ट और आयोगों तक पहुंच चुके हैं।

  • बीएड अनिवार्यता को लेकर दो विपरीत दृष्टिकोण सामने हैं – एक तरफ इसे समाप्त करने की पैरवी है, दूसरी ओर इसे बनाए रखने की कानूनी मांग।
  • साथ ही, परीक्षाओं की प्रक्रियात्मक खामियों और असमान प्रश्न वितरण ने परीक्षा की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अगले कुछ महीनों में आने वाले न्यायिक निर्णय और आयोग की कार्यवाही पर हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य निर्भर करेगा।

#UPTeacherRecruitment #LTGrade #BEDControversy #HighCourtPetition #UPEducationCommission #AssistantProfessorExam

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top