कर्मचारी के उत्तर को ठोस कारण के बिना ‘असंतोषजनक’ नहीं ठहरा सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी कर्मचारी से कारण बताओ नोटिस के तहत जवाब मांगा जाता है, तो उसके उत्तर को बिना ठोस आधार के ‘असंतोषजनक’ नहीं करार दिया जा सकता।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकलपीठ ने मुरादाबाद निवासी प्रेमपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। प्रेमपाल जिला खादी ग्रामोद्योग विभाग में कार्यरत थे। एक शिकायत के आधार पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिस पर उन्होंने अपना उत्तर प्रस्तुत किया।
हालांकि, डीएम के निर्देश पर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी, जिसके आधार पर प्रेमपाल की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियाँ समाप्त कर दी गईं। कोर्ट ने डीएम का आदेश रद्द कर दिया और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
केवल रिश्तेदार होने के आधार पर गवाह की गवाही नहीं की जा सकती खारिज: हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी गवाह की गवाही को सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि वह मृतक का करीबी रिश्तेदार है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की खंडपीठ ने 1983 के हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान दी।
मामला गाजियाबाद निवासी ब्रह्माजीत से जुड़ा है, जिन्होंने 28 अक्टूबर 1981 को रास्ते के विवाद में अपने पिता की हत्या का आरोप लगाया था। निचली अदालत द्वारा दोष सिद्ध कर आजीवन कारावास की सजा पाए अपीलकर्ताओं की अपील को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी यदि पीड़ित के रिश्तेदार हैं, तो भी उनकी गवाही को विश्वसनीयता की कसौटी पर ही परखा जाएगा, न कि महज रिश्ते के आधार पर।
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