परिषदीय विद्यालयों में उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉप आउट कम करने के लिए शासन ने आदेश संशोधित किया
उत्तर प्रदेश सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉप आउट दर कम करने के उद्देश्य से पूर्व में जारी निर्देशों में संशोधन किया है। इस आदेश के तहत अब यदि कोई छात्र बिना कारण लगातार तीन दिन तक अनुपस्थित रहता है, तो उसकी खोज-खबर लेने के लिए बुलावा टोली उसके घर जाएगी और आवश्यकतानुसार उपचारात्मक कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी।
संशोधित आदेश की मुख्य बातें
- 6 दिन से अधिक अनुपस्थिति: यदि कोई छात्र छह या उससे अधिक दिन स्कूल नहीं आता, तो प्रधानाध्यापक छात्र के घर जाकर संपर्क करेंगे और बच्चे को स्कूल वापस लाने तक निरंतर फॉलोअप करेंगे।
- अभिभावक काउंसिलिंग: 10 दिन से अधिक अनुपस्थिति पर शिक्षक और अभिभावक की बैठक आयोजित कर काउंसिलिंग कराई जाएगी।
- 21 दिन से अधिक अनुपस्थिति: यदि नौ महीने के भीतर छात्र 21 दिन से अधिक अनुपस्थित रहा, तो उसकी अनुपस्थिति के कारणों का विश्लेषण कर उन्हें दूर करने के उपाय किए जाएंगे।
- ड्रॉप आउट की परिभाषा: 30 दिन से अधिक अनुपस्थित रहने वाले छात्र को ड्रॉप आउट माना जाएगा। साथ ही यदि छात्र का नेट मूल्यांकन 35 से कम आता है, तो उसके अभिभावकों की काउंसिलिंग की जाएगी।
- विशेष प्रशिक्षण: ड्रॉप आउट घोषित छात्र के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी ताकि वे फिर से शिक्षा के मार्ग पर लौट सकें।
शासन की सख्त अनुशासनात्मक व्यवस्था
अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें ताकि स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो और बच्चों का शिक्षा से बहिष्कार कम हो।
इस आदेश के बाद उम्मीद है कि परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति में सुधार आएगा और ड्रॉप आउट की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण होगा।
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