प्रदेश में परिषदीय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए नया आदेश, 30 दिन से अधिक गैरहाजिर होने पर माना जाएगा ड्रॉपआउट
✍️ रिपोर्ट: सरकारीकलम डॉट कॉम | शिक्षा संवाददाता
लखनऊ: शैक्षिक सत्र 2025-26 में परिषदीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर कम करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नया आदेश जारी किया है।
अब यदि कोई बच्चा बिना कारण लगातार 3 दिन अनुपस्थित रहता है, तो ‘बुलावा टोली’ उसके घर जाकर संपर्क करेगी और जरूरत पड़ने पर उपचारात्मक कक्षाएं भी चलाई जाएंगी।
ड्रॉपआउट की परिभाषा बदली: 45 नहीं, अब 30 दिन से अधिक गैरहाजिर रहना होगा मापदंड
- पूर्व नियम के अनुसार 45 दिन से अधिक अनुपस्थित रहने पर बच्चा ड्रॉपआउट माना जाता था।
- नए आदेश में यह अवधि 30 दिन निर्धारित की गई है।
- अगर बच्चा नैट मूल्यांकन में 35 से कम अंक प्राप्त करता है, तो अभिभावकों की काउंसिलिंग के साथ उसे विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
नए निर्देशों के मुख्य बिंदु
- 6 दिन से अधिक अनुपस्थिति पर: प्रधानाध्यापक सीधे बच्चे के घर जाकर संपर्क करेंगे और नियमित फॉलोअप करेंगे।
- 10 दिन से अधिक अनुपस्थिति पर: शिक्षक-अभिभावक बैठक में काउंसिलिंग कराई जाएगी।
- 21 दिन से अधिक गैरहाजिरी (9 महीने में): अनुपस्थिति के कारणों का विश्लेषण कर समाधान खोजा जाएगा।
- 30 दिन से अधिक गैरहाजिरी और नैट में 35 से कम अंक: ड्रॉपआउट मानकर विशेष प्रशिक्षण की योजना बनाई जाएगी।
अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार का निर्देश
अपर मुख्य सचिव श्री दीपक कुमार ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को आदेश जारी करते हुए कहा है कि प्रत्येक स्कूल स्तर पर अनुपस्थिति की निगरानी, अभिभावक संपर्क, काउंसिलिंग और बुलावा टोली की कार्यवाही सख्ती से लागू की जाए।
उद्देश्य क्या है?
- स्कूल छोड़ने की दर घटाना
- पढ़ाई में पिछड़ रहे बच्चों को फिर से मुख्यधारा में लाना
- अभिभावकों में जागरूकता और भागीदारी बढ़ाना
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