तबादला नीति 2025-26 लागू: वर्षों से जमे अफसरों की कुर्सी डोलने लगी
अब हर विभाग में दिखेगा बदलाव का असर 🔄🏢

तबादला नीति 2025-26 लागू: वर्षों से जमे अफसरों की कुर्सी डोलने लगी
अब हर विभाग में दिखेगा बदलाव का असर 🔄🏢

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व विकास विभाग के अधिकारियों के लिए तबादला नीति 2025-26 को मंजूरी मिल चुकी है, और इससे वर्षों से एक ही जिले/मंडल में जमे अफसरों में हड़कंप मच गया है। अब तक जिन अफसरों ने पढ़ाई से लेकर नौकरी और कारोबार तक एक ही जिले में साम्राज्य खड़ा कर लिया था, उन्हें स्थानांतरण का भय सता रहा है।

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क्या है नई तबादला नीति?

  • समूह ‘क’ और ‘ख’ के जो अधिकारी एक जिले में तीन वर्ष और मंडल में सात वर्ष पूरे कर चुके हैं, उनका 15 मई से 15 जून के बीच स्थानांतरण अनिवार्य होगा।
  • तबादले 30 जून तक पूरे किए जाएंगे।
  • समूह ‘क’ और ‘ख’ के 20%, जबकि समूह ‘ग’ और ‘घ’ के 10% कर्मचारियों का वार्षिक ट्रांसफर किया जाएगा।

विजय विश्वास पंत, आयुक्त ने कहा:
“तबादला नीति का अनुपालन जिस स्तर से ट्रांसफर होता है, वहीं से सुनिश्चित किया जाएगा।”


केस स्टडी: वर्षों से कुर्सी पर काबिज अधिकारी

1. शिक्षा विभाग का अफसर

  • 2014 में डीआईओएस के पद पर पहली बार तैनात
  • तब से लेकर अब तक अलग-अलग पदों पर इसी जिले में जमे
  • अब भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं

2. पंचायती राज विभाग

  • 2003 से विभिन्न पदों पर 22 साल से जिले और मंडल में तैनात
  • बीच में केवल एक बार बाहर ट्रांसफर हुआ
  • अब भी मंडलीय अधिकारी के रूप में तैनात हैं

कौन-कौन विभाग आएंगे दायरे में?

  • विद्युत निगम: 10 अधिकारी
  • शिक्षा विभाग: 10
  • पीडीए: 5
  • नगर निगम: 5
  • विकास विभाग: 20
  • स्वास्थ्य विभाग: 10
  • लोक निर्माण विभाग (PWD): 15
  • पुलिस विभाग: 8
  • परिवहन विभाग: 5
  • वन, पर्यटन, अन्य विभाग: कुल मिलाकर 100 से अधिक अफसरों पर असर

स्थानीयता बन रही ट्रांसफर में बाधा

  • 80% अधिकारी प्रयागराज, कौशांबी, मिर्जापुर, सुल्तानपुर, वाराणसी, जौनपुर, रायबरेली, चित्रकूट जैसे पड़ोसी जिलों के निवासी
  • सामाजिक-सियासी सांठगांठ के कारण वर्षों से ट्रांसफर टलते रहे
  • अब नीति सख्ती से लागू हुई तो स्थानीय प्रभावशाली अफसरों को बाहर जाना पड़ सकता है

क्या होगी तबादला नीति की असली परीक्षा?

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह नीति सिर्फ कागजों पर ही रह जाती है या वाकई भ्रष्टाचार और स्थायी वर्चस्व को तोड़ने के लिए कठोर क्रियान्वयन होगा।


क्या आप तबादला नीति के पक्ष में हैं? कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें।
न्याय, निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए बदलाव ज़रूरी है!

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