समर कैम्प में शामिल होने वाले शिक्षकों को मिलेगा उपार्जित अवकाश! ☀️📚
लखनऊ: स्कूलों में समर कैम्प आयोजित करने को लेकर शिक्षक संगठनों के विरोध के बीच, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी पक्षों का ध्यान बीते 7 मई को जारी शासनादेश की ओर आकर्षित किया है। इस आदेश में साफ़ कहा गया है कि ग्रीष्मावकाश के दौरान 21 मई से 10 जून तक चलने वाले समर कैम्प में ड्यूटी करना सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य नहीं है।
समर कैम्प में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधान 🏫📝
- जो शिक्षक समर कैम्प में बुलाए जाएंगे, वे चाहे राजकीय विद्यालयों के हों या अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के, उन्हें नियमानुसार उपार्जित अवकाश दिया जाएगा।
- यह एक अच्छा मौका है कि शिक्षक भी अपनी सेवा के अनुसार उचित अवकाश प्राप्त करें।
विद्यार्थियों के लिए समर कैम्प के निर्देश 🎨⚽
- विद्यार्थियों के अभिभावकों से 16 मई से पहले लिखित सहमति अवश्य प्राप्त की जाए।
- समर कैम्प का उद्देश्य है बच्चों को खोज एवं खेल-खेल में सीखने के माध्यम से पढ़ाई से अलग रोचक और उपयोगी गतिविधियों का आनंद देना।
- यह बच्चों के लिए जीवन कौशल, खेल, सांस्कृतिक, साहित्यिक गतिविधियां सीखने का सुनहरा अवसर है।
विभाग की सोच और महत्वाकांक्षा 🌟
- ग्रीष्मावकाश के दौरान निजी विद्यालयों में यह आयोजन आम है, लेकिन अब इसे राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों तक बढ़ाया जा रहा है।
- बच्चों में जीवन कौशल, आत्मविश्वास, टीम वर्क, और करियर गाइडेंस जैसे गुणों को विकसित करने के लिए यह समर कैम्प बेहद जरूरी है।
- अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में समर कैम्प प्रधानाचार्य/शिक्षकों की स्वेच्छा से भी आयोजित किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
समर कैम्प न केवल बच्चों के लिए बल्कि शिक्षकों के लिए भी एक लाभकारी पहल है, जो गर्मियों के छुट्टियों में सीखने और मनोरंजन का संतुलन बनाए रखेगी। शिक्षक संगठनों के सहयोग से यह आयोजन और भी सफल होगा।
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