परिषदीय शिक्षकों की चयन वेतनमान प्रक्रिया लटकी, नाराज शिक्षक पहुंचे महानिदेशक तक
लखनऊ | शिक्षा संवाददाता — प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभ समय पर नहीं मिल रहा है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि चयन वेतनमान की ऑनलाइन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराया जाए या फिर पुरानी ऑफलाइन प्रक्रिया को बहाल किया जाए।
क्या है मामला?
- 1 जनवरी 2025 से, ऐसे शिक्षक जिन्होंने एक ही पद पर 10 साल की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली है, उनके लिए चयन वेतनमान की मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
- इसमें शिक्षक को स्वयं कोई प्रक्रिया नहीं करनी होती, केवल स्टेटस देख सकते हैं।
- बीएसए स्तर से अनुमोदन के बाद वेतनमान स्वीकृत किया जाना है।
कहां फंसी है प्रक्रिया?
- चार महीने बीतने के बाद भी कई जिलों में पहले चरण की प्रक्रिया तक पूरी नहीं हुई।
- कुछ शिक्षकों का इनीशियल कैडर अपडेट नहीं हुआ, जिससे प्रक्रिया अटक गई।
- कोई स्पष्ट सूचना या टाइमलाइन भी नहीं दी जा रही है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
एसोसिएशन की मांग:
- चयन वेतनमान की प्रक्रिया को त्वरित गति से पूरा कराया जाए।
- लंबित मामलों को पुराने ऑफलाइन सिस्टम के ज़रिए स्वीकृत किया जाए।
पदोन्नति के बावजूद नहीं संभाला कार्यभार – कार्रवाई की मांग
इसी बीच, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता से प्रधानाचार्य पद पर हाल ही में पदोन्नत किए गए 283 शिक्षकों में से 150 से अधिक ने अब तक कार्यभार नहीं संभाला है।
- उन्हें पहले 30 दिन और फिर 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया।
- अब राजकीय शिक्षक संघ ने इनकी पदोन्नति निरस्त करने और वेटिंग लिस्ट वाले शिक्षकों को अवसर देने की मांग की है।
संक्षेप में:
चयन वेतनमान और पदोन्नति दोनों ही मुद्दों पर शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। जहां एक ओर कुछ शिक्षकों को समय पर लाभ नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर पदोन्नति पाने वाले शिक्षक जिम्मेदारी नहीं संभाल रहे। प्रशासन से इन दोनों मोर्चों पर स्पष्ट कार्रवाई और दिशा-निर्देशों की ज़रूरत है।
