ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने पहलगाम हमले का लिया करारा बदला, POK में सटीक हमले से 5 बड़े आतंकी ढेर
नई दिल्ली। पहलगाम हमले का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने 6 और 7 मई की दरम्यानी रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में मौजूद आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल और सटीक हमले किए। इस कार्रवाई में आईसी-814 विमान अपहरणकांड के वांछित आतंकी मौलाना यूसुफ अजहर समेत लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच बड़े आतंकियों को ढेर किया गया।
ढेर किए गए दुर्दांत आतंकी
इस ऑपरेशन में जो पांच कुख्यात आतंकी मारे गए, उनके नाम हैं:
- मौलाना यूसुफ अजहर – जैश सरगना मसूद अजहर का साला, IC-814 अपहरण में शामिल, हथियार प्रशिक्षण का मास्टरमाइंड।
- हाफिज मोहम्मद जमील – मसूद अजहर का सबसे बड़ा बहनोई, बहावलपुर स्थित मरकज सुभान अल्लाह का प्रभारी।
- मोहम्मद हसन खान – जैश के ऑपरेशनल कमांडर मुफ्ती असगर खान कश्मीरी का बेटा।
- मुदस्सर खादियान खास उर्फ अबू जुंदाल – लश्कर का वरिष्ठ आतंकी, मुरीदके स्थित मरकज तायबा का प्रभारी।
- खालिद उर्फ अबू अकाशा – हथियार तस्करी में शामिल, जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों का आरोपी।
पाकिस्तान के झूठ की खुली पोल
इन आतंकियों के जनाजों में पाक सेना, पुलिस और शीर्ष सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य प्रायोजित समर्थन दे रहा है। मुदस्सर के जनाजे को पाकिस्तानी सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वहीं हाफिज अब्दुल रऊफ ने एक सरकारी स्कूल में नमाज की अगुवाई की।
फैसलाबाद में खालिद के जनाजे में पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अफसर और डिप्टी कमिश्नर तक शामिल हुए। यह पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किए गए झूठे दावों की पोल खोलने वाला दृश्य था।
कट्टरपंथ का गढ़ थे ये आतंकी
इन आतंकियों की भूमिका केवल हमलों तक सीमित नहीं थी। ये सभी कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने, युवाओं को उकसाने, फंडिंग जुटाने और हथियारों की ट्रेनिंग देने जैसे अहम कामों में लगे थे। हाफिज मोहम्मद जमील और मौलाना यूसुफ अजहर जैश के ब्रेनवॉश मॉड्यूल और फंडिंग नेटवर्क के प्रमुख स्तंभ थे।
मुदस्सर खादियान लश्कर का रणनीतिक ऑपरेटर था, जिसने अफगानिस्तान से हथियारों की तस्करी में पाकिस्तान के सैन्य सहयोग से कई नेटवर्क खड़े किए थे।
भारत की कूटनीति और सेना का संदेश साफ है
ऑपरेशन सिंदूर न केवल भारत की सैन्य ताकत का प्रदर्शन है, बल्कि यह दुनिया को यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि भारत अब आतंकी हमलों को बिना जवाब के नहीं छोड़ेगा।
यह अभियान प्रीसिजन स्ट्राइक का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें गुप्तचर एजेंसियों और सेना के बीच बेहतरीन तालमेल दिखा।
निष्कर्ष: अब बात एक्शन की है
पाकिस्तान बार-बार आतंक के पनाहगार की भूमिका निभाता रहा है, लेकिन अब भारत ने दिखा दिया है कि वो न सिर्फ जवाब देगा, बल्कि दुश्मन की नींव हिला देगा। ऑपरेशन सिंदूर एक रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक बढ़त है, जिसने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक बार फिर शर्मसार कर दिया है।
क्या आप मानते हैं कि भारत को ऐसे ऑपरेशनों की निरंतरता बनाए रखनी चाहिए? अपने विचार हमें कमेंट में जरूर बताएं।
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