माध्यमिक विद्यालयों में फीस बढ़ोतरी का वायरल आदेश निकला फर्जी, शिक्षा विभाग ने किया खंडन
लखनऊ। राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में शुल्क वृद्धि को लेकर शनिवार को सोशल मीडिया पर एक कथित शासनादेश तेजी से वायरल हो गया। इस आदेश में कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों से विभिन्न शुल्कों में दो से दस गुना तक वृद्धि की बात कही गई थी, जिससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल बन गया।
शिक्षा विभाग ने बताया आदेश फर्जी
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने स्पष्ट किया कि यह आदेश पूरी तरह फर्जी है और विभाग की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
आदेश पर मौजूद अधिकारी का नाम भी फर्जी
इस कथित आदेश पर संयुक्त सचिव निलेष कुमार सिंह का नाम और हस्ताक्षर थे, लेकिन उप सचिव संजय कुमार ने साफ किया कि “निलेष कुमार सिंह नाम का कोई अधिकारी माध्यमिक शिक्षा विभाग में तैनात ही नहीं है।” उन्होंने कहा कि यह किसी शरारती तत्व द्वारा गढ़ा गया आदेश है, जिससे जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है।
फर्जी आदेश में ये थीं मुख्य बातें (जिसे विभाग ने नकारा):
- विविध शुल्कों में दो से दस गुना तक वृद्धि।
- नया शुल्क कक्षा 9 से 12 के छात्रों पर लागू करने का प्रस्ताव।
- प्रभावी तिथि के रूप में मई 2025 का उल्लेख।
शिक्षा विभाग की अपील:
- कोई भी सूचना केवल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या नोटिस बोर्ड से ही मान्य समझें।
- फर्जी या भ्रामक दस्तावेज़ों से सावधान रहें।
- ऐसी गतिविधियों की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।
निष्कर्ष: वायरल हो रहा शुल्क वृद्धि वाला आदेश पूरी तरह फर्जी है और इसे लेकर कोई भी शुल्क वृद्धि फिलहाल लागू नहीं की गई है। अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन से आग्रह है कि वे अफवाहों से सतर्क रहें और केवल प्रामाणिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
