इलाहाबाद हाईकोर्ट: स्टाफ नर्स भर्ती में कटऑफ से ऊपर अंक पाने वालों का चयन न होने पर हाईकोर्ट ने यूपीपीएससी से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो अहम टिप्पणियां: भर्ती में पारदर्शिता और न्यायिक आचरण पर सख्ती


1. स्टाफ नर्स भर्ती में कटऑफ से ऊपर अंक पाने वालों का चयन न होने पर हाईकोर्ट ने यूपीपीएससी से मांगा जवाब

मामला:
स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा-2023 में कटऑफ से अधिक अंक पाने के बावजूद याचियों का चयन नहीं किया गया।

मुख्य बिंदु:

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  • याचिका दाखिल: अर्चना रानी व अन्य 10 अभ्यर्थियों ने दाखिल की।
  • कोर्ट ने यूपीपीएससी से परिणाम सीलबंद लिफाफे में तलब किया।
  • दो अभ्यर्थी (साधना यादव, अमन वर्मा) कटऑफ से ऊपर अंक लाने के बावजूद चयन सूची में नहीं।
  • टाईब्रेक नियम के हवाले से साधना को बाहर किया गया, लेकिन अमन वर्मा पर आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया।

याची पक्ष की दलील:

  • टाईब्रेक नियम तब लागू होता है जब सभी पद भर जाएं।
  • यहां महिला वर्ग में 276 व पुरुष वर्ग में 11 पद रिक्त छोड़े गए हैं।

कोर्ट की कार्रवाई:

  • यूपीपीएससी से 12 मई तक स्पष्टीकरण मांगा गया है।

2. “जज ऐसा हो, जिस पर जनता को न्यायपालिका पर भरोसा बना रहे”: हाईकोर्ट ने पीसीएसजे की याचिका खारिज की

मामला:
विशेष न्यायाधीश (कौशांबी) रमेश कुमार यादव की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को चुनौती।

मुख्य बिंदु:

  • 2021 में प्रतिकूल प्रविष्टि के आधार पर सेवा से हटाया गया।
  • याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति फरवरी 2026 में होनी थी।
  • कोर्ट ने कहा – सेवा अभिलेखों में प्रतिकूल टिप्पणियां ऐसी हैं कि जज के पद पर बने रहना उचित नहीं।

कोर्ट की टिप्पणी:

“एक जज का आचरण ऐसा होना चाहिए कि आम आदमी का न्यायपालिका में भरोसा बना रहे।”

अंतिम निर्णय:

  • कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
  • कहा कि प्रतिकूल प्रविष्टि को समय पर चुनौती नहीं दी गई, अब उस पर पुनर्विचार नहीं किया जा सकता।

निष्कर्ष:
एक ओर हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यूपीपीएससी से जवाब तलब किया है, वहीं दूसरी ओर न्यायाधीशों के आचरण पर भी सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि विश्वसनीयता न्यायपालिका की रीढ़ है।

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