युद्ध के दौरान पाकिस्तान को IMF से ऋण क्यों मिला?
पृष्ठभूमि:(Reuters)
मई 2025 में, भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को $1.4 बिलियन का नया ऋण और मौजूदा $7 बिलियन के आर्थिक स्थिरीकरण कार्यक्रम के तहत $1 बिलियन की अतिरिक्त राशि प्रदान की।
मुख्य कारण:
- आर्थिक संकट: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है, जिसमें विदेशी ऋण $131 बिलियन से अधिक है और विदेशी मुद्रा भंडार केवल तीन महीनों के आयात के लिए पर्याप्त है। युद्ध की स्थिति इस संकट को और बढ़ा सकती है। (Financial Times)
- पूर्व-स्वीकृत कार्यक्रम: IMF द्वारा प्रदान किए गए ऋण पहले से ही स्वीकृत कार्यक्रमों का हिस्सा हैं, जिन्हें हालिया सैन्य तनाव से पहले अंतिम रूप दिया गया था।
- आर्थिक स्थिरता पर ध्यान: IMF का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना है। पाकिस्तान को वित्तीय सहायता प्रदान करके, IMF देश की आर्थिक गिरावट को रोकने और आवश्यक सुधारों का समर्थन करने का प्रयास कर रहा है।
- भारत की आपत्तियाँ: भारत ने IMF को पाकिस्तान को ऋण देने पर आपत्ति जताई, यह दावा करते हुए कि ये धनराशि सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करने के लिए इस्तेमाल हो सकती है। हालांकि, IMF ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए ऋण प्रदान किया।
निष्कर्ष:
युद्ध के दौरान भी, IMF ने पाकिस्तान को वित्तीय सहायता प्रदान की है ताकि देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखा जा सके और आवश्यक सुधारों को लागू किया जा सके। हालांकि, यह सहायता अंतरराष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में विवादास्पद बनी हुई है।
