इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: समय पर विकल्प न चुनने वाले कर्मचारी नहीं होंगे पेंशन के पात्र
वाराणसी/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सीपीएफ (अंशदायी भविष्य निधि) के बदले पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प यदि निर्धारित समय में नहीं चुना गया, तो संबंधित कर्मचारी पेंशन के हकदार नहीं होंगे। यह निर्णय विशेष रूप से बीएचयू (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की अपीलों से संबंधित है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति पीके गिरि की खंडपीठ ने कहा कि:
- 1 मई 1987 के कार्यालय ज्ञापन के तहत कर्मचारियों को सीपीएफ के स्थान पर पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प चुनना था।
- जो कर्मचारी समय पर यह विकल्प नहीं चुन पाए, वे अब पेंशन योजना के हकदार नहीं हैं।
- 1986 के बाद नियुक्त कर्मचारी यदि सीपीएफ के अंतर्गत मिली राशि को 8% वार्षिक ब्याज सहित दो महीने में वापस कर दें, तो वे पेंशन के पात्र हो सकते हैं।
बीएचयू कर्मचारियों की स्थिति:
- अखौरी सुधीर कुमार सिन्हा की अपील कोर्ट ने स्वीकार कर ली क्योंकि उनकी नियुक्ति 1990 में हुई थी और उन्हें विकल्प चुनने की जरूरत नहीं थी।
- वहीं, प्रो. हरीश चंद्र चौधरी, प्रो. अजय कुमार सिंह और 25 अन्य याचिकाकर्ता समय पर विकल्प न चुन पाने के कारण अपनी पेंशन याचिका में असफल रहे।
पूर्व मामले का हवाला:
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 2013 में डॉ. सुशील कुमार सिंह को समान परिस्थितियों में पेंशन योजना का लाभ मिल चुका है। कोर्ट ने इस दलील पर विचार करते हुए केवल उसी अपील को स्वीकार किया, जहाँ विकल्प चुनने की बाध्यता साबित नहीं हुई।
निष्कर्ष:
यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय करता है जो सीपीएफ से पेंशन योजना में परिवर्तन करना चाहते हैं। समय सीमा और शर्तों का पालन किए बिना यह लाभ नहीं लिया जा सकता।
रिपोर्टर: Sarkari Kalam विधि संवाददाता
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