✍ रिपोर्ट: | SarkariKalam.com
⚖️ हेडमास्टर की ज़िम्मेदारी निभा रहे अध्यापक को मिलेगा उसका हक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई सहायक अध्यापक विद्यालय में लंबे समय से हेडमास्टर की जिम्मेदारी निभा रहा है, तो वह हेडमास्टर के पद का वेतन पाने का पात्र है — भले ही उस विद्यालय में हेडमास्टर का पद औपचारिक रूप से सृजित न हो।
📌 क्या कहा कोर्ट ने?
- जो शिक्षक वर्ष 2014 या उससे पूर्व से हेडमास्टर का काम कर रहे हैं, वे उच्च वेतन के हकदार हैं
- बेसिक शिक्षा परिषद को निर्देश: तीन वर्ष पूर्व से एरियर सहित वेतन दिया जाए
- सिर्फ छात्रों की संख्या के आधार पर हेडमास्टर पद को नकारा नहीं जा सकता
- काम का मूल्यांकन पद के आधार पर नहीं, जिम्मेदारियों के आधार पर किया जाएगा
🧾 परिषद की दलील और उसका खंडन
परिषद का तर्क:
RTE एक्ट 2009 के अनुसार, अधिकतर विद्यालयों में छात्र संख्या 150 से कम है, इसलिए वहां हेडमास्टर पद की आवश्यकता नहीं है।
कोर्ट का उत्तर:
“छात्र संख्या का निर्धारण गुणवत्ता बनाए रखने के लिए है, न कि पद का इनकार करने के लिए।”
“जब प्रबंधन शिक्षक को उच्च जिम्मेदारी देता है, तो वह वेतन का भी हकदार होता है।”
📄 स्पीकिंग ऑर्डर न देने पर बीएसए पर जुर्माना
- कोर्ट ने कौशाम्बी के बीएसए पर ₹2,000 का जुर्माना लगाया
- कारण: याची को स्पीकिंग ऑर्डर (विस्तृत निर्णय) नहीं दिया गया, केवल सारांश वेबसाइट पर अपलोड किया गया
- 72 घंटे के भीतर ऑर्डर की प्रति देने का आदेश
- कोर्ट ने कहा: “ऑफिस ज्ञापन के आधार पर कोर्ट आने को मजबूर करना दुर्भाग्यपूर्ण है”
⚠️ हाईकोर्ट का निर्देश सचिव को
- बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश
“कोई भी स्पीकिंग ऑर्डर वेबसाइट पर अपलोड करने से पहले कर्मचारी को उसकी प्रति दी जाए”
✅ निष्कर्ष
जो काम कर रहा है, वह वेतन पाने का हकदार भी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला हजारों सहायक अध्यापकों के लिए बड़ी राहत है जो बिना पदनाम के हेडमास्टर की जिम्मेदारी उठा रहे हैं।
📢 SarkariKalam.com आपके हक की लड़ाई में साथ है!
#HeadmasterSalaryCase #AllahabadHighCourt #BasicEducation #TeacherRights #SarkariKalam
क्या आप या आपके किसी जानने वाले ने बिना पदनाम के जिम्मेदारी निभाई है?
✉️ नीचे कमेंट करें या हमें लिखें!
