मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति अवैध, शासनादेश रद्द
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, शिक्षा विभाग के दो शासनादेश किए खारिज
प्रयागराज से रिपोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक पद पर की गई नियुक्तियों को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने 15 फरवरी 2013 और 16 मई 2017 को जारी शासनादेशों को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि सहायक अध्यापक का पद ‘प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया’ के तहत आता है और इस पर सीधी नियुक्ति नहीं हो सकती।
कोर्ट ने कहा – आर्थिक राहत देना उद्देश्य, चयन प्रक्रिया बाधित नहीं होनी चाहिए
माननीय न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकल पीठ ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा –
“लोकसेवा की नियुक्ति प्रतियोगिता से भरी जानी चाहिए। केवल आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों को राहत देना एक उद्देश्य हो सकता है, लेकिन उसकी आड़ में योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।”
इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत सिर्फ उन्हीं पदों पर नियुक्ति दी जानी चाहिए जो प्रतियोगिता परीक्षा से मुक्त हों।
कौन-कौन से आदेश हुए रद्द?
- शासनादेश दिनांक 15 फरवरी 2013 – सहायक अध्यापक की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में करने की अनुमति।
- शासनादेश दिनांक 16 मई 2017 – उक्त को विस्तारित करने वाला आदेश।
कोर्ट ने इन दोनों को रद्द करते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन है।
शिक्षा विभाग को बड़ा झटका
इस फैसले से उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग की उन सभी नियुक्तियों पर असर पड़ेगा जो मृतक आश्रित नीति के तहत सहायक अध्यापक पदों पर की गई थीं। यह फैसला राज्य भर के स्कूलों में ऐसे नियुक्त किए गए शिक्षकों के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।
उपकरण घोटाले से जुड़ा मामला भी चर्चा में
इस बीच फर्रुखाबाद में दिव्यांग उपकरण घोटाले में आरोपी अधिकारी सलमान खुर्शीद के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोपों की जांच में तेजी आई है। कोर्ट ने इस मामले में 21 और 31 धाराओं में मुकदमा चलाने की बात कही है।
